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कर्नल हिम्मत वर्मा (सेवानिवृत्त): भारत की ओलंपिक गौरव की खोज में एक भारतीय सेना के अनुभवी अधिकारी

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भारत ने सन 1900 से अब तक 28 ग्रीष्मकालीन ओलम्पिक में भाग लिया है और स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद कुल 20 बार हिस्सा लिया है। फिर भी पदक सूची ने बहुत कम ही देश की क्षमताओं को दर्शाया है, क्योंकि अब तक प्राप्त पदकों की संख्या 10 से भी कम रही है। 44 वर्ष से कम आयु वाली लगभग 65 करोड़ की जनसंख्या के साथ, जो विश्व की जनसंख्या का 18 प्रतिशत है, तथा 210 देशों में फैले सबसे बड़े प्रवासी समुदाय के आधार पर, भारत के पास अत्यंत विशाल मानव संसाधन उपलब्ध हैं। भौगोलिक विविधता और 7,500 किलोमीटर से अधिक के समुद्री तट के साथ, देश में ओलम्पिक में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के लिए सभी आवश्यक तत्व मौजूद हैं।

जब भी हमारे खिलाड़ी मैदान में उतरते हैं, हम सांस रोके हुए पदक की आशा करते हैं। हम उनके प्रदर्शन में प्रतिभा की चमक और विजय के क्षणों को देखते हैं, जब वे गौरव के और निकट पहुंचते हैं, परंतु अक्सर वास्तविकता हमें झकझोर देती है, और अंतिम क्षणों में मिली असफलता ही हमारे पास उत्सव मनाने हेतु रह जाती है। हमारे बच्चों के दिलों में जुनून की आग है। वे सड़क की लाइटों के नीचे अभ्यास करते हैं और स्वर्ण पदक के सपने देखते हैं, परंतु केवल जुनून इन कमीओं को दूर नहीं कर सकता।

100 मैडल्स टार्गेटेड फाउंडेशन के पीछे की दृष्टि

भारत के ओलम्पिक में निराशाजनक प्रदर्शन ने कर्नल वर्मा के लिए 100 मैडल्स टार्गेटेड फाउंडेशन की स्थापना का मूल कारण बनाया। वे कहते हैं कि “हम एक विशाल राष्ट्र हैं, जहाँ विविध भौगोलिक और जनसांख्यिक परिस्थितियाँ मौजूद हैं, जो सभी प्रकार की शारीरिक संरचनाओं तथा खेलों की आवश्यकताओं को पूरा करती हैं। फिर भी हमारा प्रदर्शन अत्यधिक कमज़ोर रहा है। प्रांतीयता, भ्रष्टाचार और जीतने की गंभीर इच्छा का अभाव इसके मुख्य कारण हैं। इन समस्याओं का समाधान आवश्यक था, इसलिए हमने यह फाउंडेशन शुरू किया। हमारा उद्देश्य वर्तमान प्रणाली को बदलना नहीं है, बल्कि अनावश्यक लालफीताशाही को पार करते हुए प्रतिभा की पहचान करना और पूरी प्रक्रिया को जनतांत्रिक रूप देना है।”

यह ग़ैर-लाभकारी संगठन सौ पदक के नाम से भी जाना जाता है और कंपनी अधिनियम की धारा 8 के अंतर्गत पंजीकृत है। इसका लक्ष्य समाज के सभी वर्गों के बच्चों में खेल प्रतिभा की खोज करना है। कर्नल वर्मा आगे कहते हैं कि “हमारा उद्देश्य यह है कि खेलों को गाँवों तक पहुँचाया जाए और वंचित बच्चों को शिक्षा, चिकित्सकीय सहायता, स्वास्थ्य परीक्षण, खेल उपकरण तथा आधारभूत संरचना देकर खेल अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। तभी भारत की वास्तविक प्रतिभा सामने आ सकेगी।”

टीम और संचालन

100 मैडल्स टार्गेटेड फाउंडेशन का ध्यान एक ऐसे इकोसिस्टम के निर्माण पर केंद्रित है, जो युवा खिलाड़ियों को पोषित करे तथा पारदर्शिता, जवाबदेही और परिणाम-केंद्रित दृष्टिकोण को बनाए रखे। इस दृष्टि को वास्तविकता में बदलने के लिए फाउंडेशन जयपुर से संचालित एक 12 सदस्यों की लीन कोर टीम के साथ काम करता है, ताकि अधिकतम संसाधन सीधे खेलों के उत्थान में लगाए जा सकें। कर्नल वर्मा बताते हैं — “हमारा कार्य करने का तरीका (mod us operandi) हमेशा लीन रहने का है और प्रशासनिक खर्चों को न्यूनतम रखना है, ताकि जितना संभव हो उतना धन खेलों के संवर्धन में इस्तेमाल किया जा सके।”

कार्यान्वयन एवं मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी उन प्रोजेक्ट मैनेजरों के माध्यम से निभाई जाती है, जिन्हें प्रत्येक प्रोजेक्ट की आवश्यकता के अनुसार नियुक्त किया जाता है। कोर टीम को अत्यंत सावधानी से चुना गया है, प्रशिक्षित किया गया है और उनका अभिमुखीकरण किया गया है, तथा यह टीम पिछले चार वर्षों से पूरी तरह एकजुट और स्थिर बनी हुई है। कर्नल वर्मा कहते हैं —

“सावधानीपूर्वक चयन, प्रशिक्षण, अभिमुखीकरण और निरंतरता—ये ही एक प्रेरित और संलग्न टीम बनाने का हमारा मूल मंत्र रहा है।”

विपरीत परिस्थितियों के बीच संघर्ष

एक नॉट-फॉर-प्रॉफिट संस्था (not-for-profit organisation) चलाना अपने आप में एक चुनौतीपूर्ण यात्रा रही है। सबसे बड़ी कठिनाइयों में से एक रही — दृश्यता (visibility) की कमी। कर्नल वर्मा बताते हैं — “सोशल मीडिया मार्केटिंग आज हर संस्था के लिए केन्द्र में आ चुकी है। यह हमारे लिए एक भारी चुनौती रही, क्योंकि आर्मी स्मार्टफोन्स के प्रयोग को प्रतिबंधित या पूरी तरह निषिद्ध करती है, सोशल मीडिया तो बहुत दूर की बात है। मेरे जैसे व्यक्ति के लिए इस डिजिटल वास्तविकता के अनुरूप ढलना आसान नहीं था।”

एक अन्य बड़ा अवरोध रहा — एन.जी.ओ. (NGO) को लेकर धारणा। कर्नल वर्मा कहते हैं — “दुर्भाग्यवश भारत में एन.जी.ओ. को अक्सर संदिग्ध संस्था माना जाता है, और सी.एस.आर. (CSR) का क्षेत्र पहले से ही काफी भरा हुआ है। ग्रांट्स, डोनेशंस और अन्य प्रकार के परोपकारी सहयोग प्राप्त करना अत्यंत कठिन कार्य है, विशेष रूप से जब आप इस क्षेत्र में नए हों।”

इसके अतिरिक्त, फंडिंग साइकिल्स एक एग-ऑर-हेन डिलेमा (egg-or-hen dilemma) को जन्म देती हैं — लोग परिणाम देखना चाहते हैं, लेकिन परिणाम के लिए पहले फंडिंग की आवश्यकता होती है। कर्नल वर्मा एक महत्वपूर्ण प्रश्न पूछते हैं — “मैं कितने समय तक केवल अपनी पेंशन से एन.जी.ओ. को चला सकता हूँ?”

इन सभी कठिनाइयों के बावजूद, कर्नल वर्मा अपनी शक्ति आर्मी में बिताए वर्षों से प्राप्त करते हैं — विशेषकर नेशनल डिफेन्स एकेडमी (NDA) और इंडियन मिलिट्री एकेडमी (IMA) में हुए प्रशिक्षण से। “वे वर्ष केवल आर्मी के लिए नहीं, बल्कि पूरे जीवन के लिए आपको तैयार करते हैं,” वे कहते हैं।

उनके नेतृत्व में, फाउंडेशन ने वित्तीय संयम (financial prudence), पारदर्शिता (transparency) और परिणाम-उन्मुख कार्यशैली के लिए बेहद कम समय में ही एक सुदृढ़ पहचान बना ली है। इस फाउंडेशन को जो अलग पहचान देती है, वह है इसका स्पष्ट एवं केंद्रित उद्देश्य — “हमारा कोर क्षेत्र केवल ओलंपिक स्पोर्ट्स के लिए समर्पित है। वास्तविक लाभ और परिणाम तभी स्पष्ट रूप में दिखेंगे, जब हम पूरी तरह ऑपरेशनल हो जाएंगे — और वह दिन कभी भी आ सकता है,” कर्नल वर्मा कहते हैं।

फाउंडेशन को आकार देने वाले तत्व

जैसे-जैसे फाउंडेशन भारत के खेल परिदृश्य को बदलने और 100 ओलंपिक मेडल के महत्वाकांक्षी लक्ष्य की ओर आगे बढ़ रहा है, उसके संचालन को ऐसे मुख्य मूल्यों द्वारा दिशा दी जाती है, जो वर्षों से लगातार बने हुए हैं।

कोर प्रिंसिपल

कोर प्रिंसिपल ईमानदार प्रस्तुतीकरण, सत्यपूर्ण रिपोर्टिंग और नैतिक वित्तीय प्रक्रियाओं पर जोर देते हैं — ताकि यह स्पष्ट रूप से संप्रेषित हो सके कि फंड्स का उपयोग कैसे किया जा रहा है।

इनमें अपने कार्यों और परिणामों की जिम्मेदारी लेना, एथिकल अकाउंटिंग बनाए रखना और डोनर रिपोर्ट्स को सही रूप में प्रदान करना शामिल है। संस्थाओं से अपेक्षा की जाती है कि वे किसी भी पॉलिटिकल पार्टी या एजेंडे से स्वतंत्र होकर कार्य करें, और केवल मानवीय / विकासात्मक लक्ष्यों पर केंद्रित रहें।

वे जिन लोगों की सेवा करते हैं, उनकी गरिमा, अधिकार, और गोपनीयता की रक्षा करना आवश्यक है, साथ ही फंडरेज़िंग एक्टिविटीज़ को नैतिक तरीके से संचालित करना तथा पारदर्शी संप्रेषण करना कि योगदानों का उपयोग कैसे किया जाएगा।

ऑपरेशनल वैल्यूज़

संगठन सार्वभौमिक सिद्धांतों को बनाए रखने और सोशल इक्विटी को बढ़ावा देने के प्रति प्रतिबद्ध है, साथ ही एक ऐसा इन्क्लूसिव इन्वॉयरन्मेंट तैयार करता है जो विविध विचारों एवं पृष्ठभूमियों का सम्मान करता है। यह अपने सभी संचालन में लोकल कल्चर्स और परंपराओं को समझने और उनका सम्मान करने को महत्व देता है, तथा भारत के भीतर नेशनल रेगुलेशंस और कानूनी आवश्यकताओं का कठोर पालन सुनिश्चित करता है।

पब्लिक-माइंडेडनेस की गहरी भावना से निर्देशित होकर, संगठन समाज के व्यापक कल्याण को केंद्र में रखते हुए कार्य करता है, और हर कदम पर जनता के हित को प्राथमिकता देता है।

ऑर्गनाइज़ेशनल कल्चर

संगठन की संस्कृति सेवा भावना और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की प्रतिबद्धता पर आधारित है। यह एक स्पष्ट विजन और मिशन को बनाए रखता है, जो उसके कोर वैल्यूज़ के अनुरूप है, जिससे हर कार्रवाई उद्देश्यपूर्ण और वैल्यू-ड्रिवन बनती है।

संगठन अपने उद्देश्य के लिए रिस्पॉन्सिबल एडवोकेसी करता है, जबकि अपनी स्वतंत्रता और फ़ोकस बनाए रखता है। इसके अलावा, यह ऐसे कार्य-ढांचे और संस्कृति को बढ़ावा देता है जो फाउंडेशन की लॉन्ग-टर्म इफेक्टिवनेस, सस्टेनेबिलिटी, और ओवरऑल वायबिलिटी को मजबूत करते हैं।

पहचान और मान्यता

100 मेडल्स टारगेटेड फ़ाउंडेशन के लिए सफलता का अर्थ संगठन के मूल सिद्धांतों के पालन से निर्धारित होता है।

कर्नल वर्मा कहते हैं, “हमारे लिए सफलता का मतलब यह सुनिश्चित करना है कि टैलेंट आइडेंटिफ़िकेशन से लेकर मेंटरशिप तक, हर प्रक्रिया पूरी तरह त्रुटिरहित और निर्विघ्न हो — ताकि हम अपने बनाए गए सिस्टम्स को प्रमाणित कर सकें।”

फ़ाउंडेशन सफलता को उन कॉरपोरेट्स, फ़िलान्थ्रॉपिस्ट्स और सरकारी एजेंसियों से अर्जित विश्वसनीयता के आधार पर भी मापता है, जिनकी बदौलत पूरे भारत में खेलों के विकास हेतु दीर्घकालिक प्रोग्राम्स को क्रियान्वित किया जा सके।

इस दृष्टि के केंद्र में समावेशन है। सफलता का अर्थ स्पोर्ट्स ईकोसिस्टम में सार्थक योगदान देना भी है — विशेष रूप से दिव्यांग नागरिकों, जेंडर इक्वेलिटी और ग्रामीण भारत पर फ़ोकस करते हुए, ताकि अंततः ओलंपिक्स में भारत की मेडल तालिका को उल्लेखनीय रूप से बेहतर किया जा सके।

हालाँकि फ़ाउंडेशन की यात्रा योजनाबद्ध और संतुलित रही है, परन्तु अब तक उसने कई महत्वपूर्ण माइलस्टोन्स हासिल किए हैं। सीके बिरला, एयू बैंक, केडिया बिल्डर्स एंड कॉलोनाइज़र्स, हिन्दुस्तान सॉल्ट और कैलअवे जैसे शीर्ष ब्रांड्स ने इसके इवेंट्स को स्पॉन्सर किया है — जो इसके मिशन के प्रति बढ़ते विश्वास को दर्शाता है। अक्टूबर 2024 में इंडियन आर्मी एडीजीपीआई ने जयपुर में आयोजित फ़ाउंडेशन के टैलेंट आइडेंटिफ़िकेशन गोल्फ टूर्नामेंट को एक ट्वीट के माध्यम से मान्यता दी, जिससे इसके प्रयासों को और पुष्टि मिली। हाल ही में, ब्रान्डकाउंसिल रेटिंग्स, रैंकिंग एंड रिसर्च द्वारा संगठन को ‘फ़्यूचर ब्रान्ड इन फ़ोकस’ के रूप में सर्टिफ़िकेट ऑफ़ अचीवमेंट प्रदान किया गया।

फ़ाउंडेशन द्वारा उठाए गए हर इनिशिएटिव को समुदाय से उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली है, और सोशल मीडिया फ़ीडबैक एक अनौपचारिक किंतु महत्त्वपूर्ण इम्पैक्ट मीजर के रूप में उभरा है। ये माइलस्टोन्स, इसके मिशन-प्रधान दृष्टिकोण के साथ मिलकर, एनजीओ को निरंतर मार्गदर्शन प्रदान करते हैं, जब वह भारत के खेल परिदृश्य को बदलने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

आगे की राह

100 मेडल्स टारगेटेड फ़ाउंडेशन के लिए इस समय सबसे महत्त्वपूर्ण कार्य उन प्रोजेक्ट रिपोर्ट्स पर है, जो भारत की मेडल संभावनाओं पर सबसे कम समय में असर डाल सकें।

कर्नल वर्मा कहते हैं, “यह हमें अपनी विश्वसनीयता और तेज़ी से स्थापित करने में सहायता करेगा।”

इसके साथ ही, फ़ाउंडेशन यह भी तलाश रहा है कि न्यूनतम प्रयास और संसाधनों के इष्टतम उपयोग के साथ 100 मेडल्स का लक्ष्य कैसे हासिल किया जाए।

भविष्य को देखते हुए, कोलोनल वर्मा स्पोर्ट्स इंडस्ट्री में अपार संभावनाएँ देखते हैं। वह कहते हैं, “स्पोर्ट्स सबसे तेज़ी से बढ़ती हुई इंडस्ट्रीज़ में से एक है, जिसकी मार्केट पोटेंशियल 600 बिलियन तक है। एक राष्ट्र के रूप में, मेरा मानना है कि हमने अभी शुरुआत भी नहीं की है। इसलिए स्कोप अत्यंत विशाल है।”

वह आगे जोड़ते हैं कि जैसे ही सरकार से अपेक्षित इम्पेटस प्राप्त होगा — जिसका एक हालिया उदाहरण स्पोर्ट्स गुड्स पर जीएसटी को घटाकर पाँच प्रतिशत करना है — भारत में स्पोर्ट्स का विकास अवश्यंभावी होगा, वह भी प्राकृतिक रूप से।

परिवर्तन बनें

जब उनसे पूछा गया कि वह इंडस्ट्री में शुरुआत करने वालों या अपनी इनिशिएटिव्स पर विचार कर रहे लोगों को क्या सलाह देना चाहेंगे, तो कर्नल वर्मा ने भारत के खेल परिदृश्य में बदलाव लाने के इच्छुक सभी लोगों को खुला निमंत्रण दिया।

उन्होंने कहा, “जितने ज़्यादा, उतना बेहतर। जितने ज़्यादा लोग इस मिशन से जुड़ेंगे, उतनी ही तेज़ी से भारत 100 ओलंपिक मेडल्स के लक्ष्य तक पहुँचेगा।”

उनके शब्द प्रेरणा भी हैं और एक आह्वान भी — जो कॉरपोरेट्स, फ़िलान्थ्रॉपिस्ट्स और व्यक्तियों को समान रूप से आमंत्रित करते हैं कि वे राष्ट्र के खेल भविष्य को पुनर्परिभाषित करने के लिए समर्पित इस आंदोलन में अपना योगदान दें।

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