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3बी टूरिज़्म

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ओनरशिप, अनुशासन और स्ट्रैटेजिक अनुभव डिज़ाइन के ज़रिए MICE को नया रूप

एक ऐसे इंडस्ट्री में जहां अक्सर क्रिएटिविटी सबसे आगे रहती है, आज असली फर्क ओनरशिप से आता है। कॉरपोरेट इवेंट्स और इंसेंटिव प्रोग्राम अब सिर्फ उनके बड़े पैमाने या दिखावे से नहीं, बल्कि इस बात से आंके जाते हैं कि वे बिज़नेस के नतीजे कितनी आसानी से देते हैं। बदलते हुए MICE माहौल में, 3बी टूरिज़्म ने खुद को एक एक्ज़िक्यूशन-फर्स्ट पार्टनर के तौर पर स्थापित किया है, जो एंड-टू-एंड ओनरशिप और साफ़-सुथरे एक्ज़िक्यूशन के ज़रिए जटिल कॉरपोरेट अनुभवों को आसान बनाता है।

अप्रैल-2023 में स्वाति काले और ज़मीर अहमद द्वारा शुरू की गई 3बी टूरिज़्म की स्थापना का मकसद कॉरपोरेट ट्रैवल और MICE एक्ज़िक्यूशन में ज़्यादा ओनरशिप, साफ़ समझ और जवाबदेही लाना था।

3बी टूरिज़्म की शुरुआत

3बी टूरिज़्म से पहले, स्वाति ने हॉस्पिटैलिटी, कॉरपोरेट ट्रैवल और इवेंट्स में दो दशकों से ज़्यादा समय काम किया। उनके करियर में साइट इंस्पेक्शन, आख़िरी वक्त के बदलाव, क्राइसिस मैनेजमेंट और क्लाइंट एस्केलेशन जैसे ज़मीनी रोल शामिल रहे, जिससे उन्हें यह समझ मिली कि जब उम्मीदें बहुत ज़्यादा होती हैं तो इंडस्ट्री कैसे काम करती है।

समय के साथ एक बात साफ़ हो गई। क्लाइंट्स ज़्यादातर क्रिएटिविटी की कमी से नाराज़ नहीं होते थे, बल्कि असली समस्या ओनरशिप की कमी थी। कई वेंडर्स, बार-बार हैंडओवर और जिम्मेदारी का साफ़ न होना, अक्सर एक्ज़िक्यूशन में गैप पैदा कर देता था। यही समझ 3बी टूरिज़्म की नींव बनी। स्वाति याद करती हैं, “शुरुआती समस्या बहुत सीधी थी: पांच बिखरे हुए पार्टनर्स की जगह एक ज़िम्मेदार पार्टनर।”

यही विज़न ज़मीर के साथ भी साझा था। ट्रैवल इंडस्ट्री में 16 साल से ज़्यादा के अनुभव के साथ, वे 3बी टूरिज़्म इंडिया प्राइवेट लिमिटेड में MICE और एयरलाइन ऑपरेशंस की गहरी समझ लेकर आए। उनका प्रोफेशनल सफर क्लियरट्रिप, कॉक्स एंड किंग्स, इंस्टा टूरिज़्म और 2हब जैसे बड़े ब्रांड्स से होकर गुज़रा है, जिसने उनकी प्लानिंग और डिलीवरी की सोच को आकार दिया।

2025 तक यह सोच और आगे बढ़ चुकी थी। कंपनी सिर्फ एक्ज़िक्यूशन तक सीमित न रहकर, क्लाइंट्स को उनके बिज़नेस गोल्स, बजट, टाइमलाइन और रिस्क को ध्यान में रखते हुए अनुभव डिज़ाइन करने में मदद करने लगी। धीरे-धीरे 3बी टूरिज़्म “एक इवेंट एजेंसी” से एक स्ट्रैटेजिक अनुभव पार्टनर में बदल गई, और यही बदलाव उसके विकास में एक अहम भूमिका बना।

कॉरपोरेट अनुभवों के लिए एक एकीकृत तरीका

3बी टूरिज़्म ऐसे समय में MICE और कॉरपोरेट इवेंट्स के क्षेत्र में काम कर रहा है, जब उम्मीदें काफी बदल चुकी हैं। आज कंपनियां सिर्फ इवेंट तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि बिज़नेस नतीजे, कर्मचारियों की भागीदारी, पार्टनर रिश्ते, ब्रांड की मेल और भरोसे को भी उतनी ही अहमियत देती हैं। बजट पर सख़्त नज़र होने के कारण, क्लाइंट्स ऐसे पार्टनर चाहते हैं जो जटिल कामों को बिना अतिरिक्त परेशानी बढ़ाए संभाल सकें।

इसी माहौल में 3बी टूरिज़्म एक भरोसेमंद, एक्ज़िक्यूशन-फर्स्ट पार्टनर के रूप में काम करता है, खासकर एंटरप्राइज़ और BFSI संगठनों के लिए। जब भरोसे और साफ़ कामकाज की ज़रूरत होती है, तब क्लाइंट्स टीम पर पूरा विश्वास करते हैं कि वह हर असाइनमेंट को प्रोफेशनल तरीके से, पारदर्शिता के साथ और शुरू से अंत तक संभालेगी। स्वाति के शब्दों में, “अगर मुझे 3बी टूरिज़्म को एक लाइन में समझाना हो, तो मैं कहूंगी, ‘हम जटिल कॉरपोरेट अनुभवों को आसान बनाते हैं।’”

कंपनी की सेवाओं में कॉरपोरेट मीटिंग्स, कॉन्फ्रेंस, देश और विदेश की इंसेंटिव ट्रैवल, बड़े स्तर के कॉरपोरेट इवेंट्स और ब्रांड एक्टिवेशन शामिल हैं। इसकी सबसे बड़ी खासियत है इंटीग्रेशन। वेन्यू और लॉजिस्टिक्स से लेकर खाना-पानी, प्रोडक्शन, डेलिगेट मैनेजमेंट और आर्टिस्ट कोऑर्डिनेशन तक, सब कुछ एक ही फ्रेमवर्क में संभाला जाता है। इससे कई एजेंसियों की ज़रूरत खत्म होती है और पूरा एक्ज़िक्यूशन आसान और सुचारू रहता है।

“3बी टूरिज़्म में हम मानते हैं कि अनुभव संगठनों और लोगों को आकार देने की ताकत रखते हैं। हमारा मिशन बहुत साफ़ है—ईमानदारी, ज़िम्मेदारी और पूरी ओनरशिप के साथ ऐसे अनुभव बनाना जो मायने रखते हों।”

स्वाति काले – फाउंडर – 3बी टूरिज़्म इंडिया प्राइवेट लिमिटेड

समाधान पर केंद्रित सोच

तेज़ी से बदलते बिज़नेस माहौल में, 3बी टूरिज़्म तेज़ी से ज़्यादा साफ़ सोच को महत्व देता है। कंपनी उसी पर ध्यान रखती है जो वह सबसे बेहतर करती है, अपने ऑपरेशंस को सरल रखती है और हर मौके के पीछे नहीं भागती। फैसले जल्दी लिए जाते हैं, बातचीत सीधी रहती है और वादे सोच-समझकर किए जाते हैं, बिना ज़रूरत से ज़्यादा आश्वासन दिए।

यह तरीका ही ब्रांड को अलग बनाता है। लाइव इवेंट्स में जहां अचानक समस्याएं आना आम बात है, वहां टीम बहाने ढूंढने के बजाय ज़िम्मेदारी लेती है और समाधान पर ध्यान देती है। इसी ओनरशिप वाली सोच ने लंबे समय का क्लाइंट भरोसा बनाया है। एंटरप्राइज़ और BFSI क्लाइंट्स के साथ काम करने का अनुभव, कंप्लायंस, गोपनीयता और सख़्त टाइमलाइन की समझ को और मज़बूत करता है।

विश्वसनीयता और भरोसा बनाना

“शुरुआत में सबसे मुश्किल काम एक नए ब्रांड के तौर पर भरोसा बनाना था, खासकर ऐसे इंडस्ट्री में जो रिश्तों पर चलती है,” स्वाति याद करती हैं। बहुत से लोग उन्हें पहले से जानते थे, लेकिन कंपनी नई थी। भरोसा बनने में वक्त लगा और पूरा फोकस सिर्फ डिलीवरी पर रहा। प्रेज़ेंटेशन या पिच पर निर्भर रहने के बजाय, टीम ने एक्ज़िक्यूशन पर ध्यान दिया, क्योंकि इस इंडस्ट्री में काम की आवाज़ पिच डेक से कहीं ज़्यादा तेज़ होती है।

कंपनी के सफर में एक अहम मोड़ तब आया, जब 1,700 से ज़्यादा डेलिगेट्स वाले बड़े अंतरराष्ट्रीय इंसेंटिव प्रोग्राम को सफलतापूर्वक पूरा किया गया। हालांकि स्वाति के लिए असली उपलब्धि बार-बार मिलने वाला काम है। साल दर साल क्लाइंट्स का वापस आना, इस बात का सबूत है कि कंपनी कितनी आगे बढ़ चुकी है।

टेक्नोलॉजी से मजबूत, इंसानों द्वारा संचालित, पर्यावरण के प्रति ज़िम्मेदार

तेजी से डिजिटल होते माहौल में 3बी टूरिज़्म प्लानिंग, बजटिंग, डेलिगेट मैनेजमेंट, वेंडर कोऑर्डिनेशन और रिपोर्टिंग में टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करता है। स्वाति बताती हैं, “AI हमें काम को ज़्यादा एफिशिएंट बनाने और मैन्युअल मेहनत कम करने में मदद करता है।” वह आगे कहती हैं, “लेकिन इवेंट्स हमेशा लोगों से जुड़ा बिज़नेस रहेंगे। टेक्नोलॉजी हमारा साथ देती है, लेकिन अनुभव और समझ ही रास्ता दिखाते हैं।”

यही व्यावहारिक सोच सस्टेनेबिलिटी तक भी जाती है। टीम लोकल वेंडर्स के साथ काम करती है, बेकार होने वाली चीज़ों को कम करती है, गैर-ज़रूरी मटीरियल से बचती है और ज़िम्मेदार वेन्यू चुनती है। उनके लिए जिम्मेदारी से काम करना लंबे समय में अच्छा बिज़नेस करने का तरीका है।

आगे का रास्ता

पिछला साल दुनिया भर में अनिश्चितता से भरा रहा। इस दौरान 3बी टूरिज़्म ने कैश फ्लो की सख़्त निगरानी, मज़बूत क्लाइंट रिश्तों और कंट्रोल्ड ग्रोथ जैसी बुनियादी बातों पर फोकस किया। तेज़ी से बड़ा होने के बजाय, कंपनी ने स्थिरता और निरंतरता को प्राथमिकता दी, यह मानते हुए कि बहुत तेज़ी से न बढ़ना भी एक स्ट्रैटेजिक फैसला हो सकता है।

यह सोच ज़्यादा स्ट्रक्चर्ड ग्लोबल इंसेंटिव प्रोग्राम्स पर चल रहे काम में भी दिखती है, जहां बेहतर रिस्क प्लानिंग, कंप्लायंस फ्रेमवर्क और इंश्योरेंस इंटीग्रेशन पर ज़ोर दिया जा रहा है। जैसे-जैसे क्लाइंट्स रिस्क को लेकर ज़्यादा सतर्क हो रहे हैं, कंपनी इन चर्चाओं को आगे बढ़ाना चाहती है, न कि सिर्फ़ प्रतिक्रिया देना।

आगे चलकर यही फोकस 3बी टूरिज़्म को एक भरोसेमंद ग्लोबल MICE पार्टनर के रूप में आगे बढ़ाने में मदद करेगा, साथ ही उसका बुटीक और हैंड्स-ऑन तरीका भी बना रहेगा। स्वाति कहती हैं, “ग्रोथ ज़रूरी है, लेकिन वैल्यूज़, क्वालिटी और क्लाइंट के भरोसे की कीमत पर नहीं।”

लीडरशिप मंत्र

3बी टूरिज़्म में लीडरशिप पारदर्शिता और भरोसे पर टिकी है। स्वाति कहती हैं, “मैं माइक्रोमैनेज किए बिना जुड़े रहने में विश्वास रखती हूं।” जब लोगों को ओनरशिप मिलती है, तो जिम्मेदारी अपने आप आ जाती है। लोग मेहनत भी करते हैं और बैलेंस की अहमियत भी समझते हैं—जो लंबे समय के लिए बहुत ज़रूरी है।

अपने सफर को याद करते हुए वह नए लोगों को साफ़ सलाह देती हैं, “स्केल करने से पहले भरोसा बनाएं। अपने कैश फ्लो को गहराई से समझें। और रिश्तों की ताकत को कभी कम न आंकें—खासकर अनिश्चित समय में।”

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