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सुमन एस. रॉय: सही सिस्टम, नई सोच और मजबूत काम के तरीके से ब्रांड अनुभव को आगे बढ़ाना

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आज के समय में जब ब्रांड को लोगों तक पहुंचाने के नए तरीके तेजी से बढ़ रहे हैं, कंपनियां अब सिर्फ पारंपरिक तरीकों पर निर्भर नहीं रहना चाहतीं। वे ऐसे स्ट्रक्चर वाले ब्रांड अनुभव बनाना चाहती हैं जो साफ असर दिखाएं और सही नतीजे दें। इस क्षेत्र में अक्सर काम बिखरा हुआ होता है और कीमत के आधार पर फैसले लिए जाते हैं, ऐसे में रचनात्मकता के साथ सही तरीके से काम करने की क्षमता बहुत जरूरी बन गई है।

इसी बदलते माहौल में सुमन एस. रॉय एक अहम नाम हैं, जो सिनर्जी मारकॉम में मार्केटिंग और स्ट्रैटेजिक ग्रोथ के डायरेक्टर हैं। मुंबई से काम करने वाली यह कंपनी पूरे भारत में ब्रांड अनुभव से जुड़े काम करती है। एक मजबूत टीम और 40 से ज्यादा शहरों में फैले अपने नेटवर्क के साथ, यह कंपनी एग्ज़िबिशन, रिटेल रोलआउट और अलग-अलग अनुभव वाले प्लेटफॉर्म पर काम करती है।

रॉय की लीडरशिप में, सिनर्जी मारकॉम ने ऐसे सिस्टम और तरीके बनाए हैं जो बड़े स्तर पर काम कर सकें और टेक्नोलॉजी की मदद से ब्रांड्स के लिए इसे एक मजबूत ग्रोथ इंजन बना सकें।

कॉरपोरेट मार्केटिंग से मिली नींव

रॉय का करियर कॉरपोरेट मार्केटिंग के माहौल में शुरू हुआ, जहाँ उन्होंने आदित्य बिड़ला ग्रुप जैसी बड़ी कंपनियों के साथ काम किया। इन शुरुआती अनुभवों ने उन्हें यह समझ दी कि बड़े संगठन ब्रांड को कैसे संभालते हैं, कैसे प्लानिंग करते हैं और कैसे नतीजों पर ध्यान देते हैं।

कॉरपोरेट में काम करते हुए उन्होंने एक आम समस्या देखी। कंपनियां एग्ज़िबिशन, रिटेल एक्टिविटी और ग्राउंड लेवल मार्केटिंग पर काफी खर्च करती थीं, लेकिन उसे बिज़नेस ग्रोथ में बदल नहीं पाती थीं। रचनात्मक काम और असली नतीजों के बीच का फर्क साफ दिखने लगा था।

इसी दौरान, रॉय ने अलग तरह के मार्केटिंग आइडियाज पर काम करना शुरू किया। रेडियो मिर्ची के साथ काम करते हुए उन्होंने ऐसे कैंपेन बनाए जो युवाओं को नए म्यूजिक फॉर्मेट से जोड़ते थे। टेक्नोलॉजी, मूवमेंट और क्रिएटिव सोच को मिलाकर उन्होंने ऐसे अनुभव तैयार किए जिससे लोगों की भागीदारी और ब्रांड की पहचान दोनों बढ़ी।

इन अनुभवों से उन्हें एक अहम बात समझ आई—सिर्फ क्रिएटिविटी से काम नहीं चलता। असली नतीजे पाने के लिए स्ट्रैटेजी, सही सिस्टम और अनुशासन के साथ काम करना जरूरी है। यही सोच आगे चलकर उनके बिज़नेस की दिशा तय करती है।

लीडरशिप को आकार देने वाले अहम मोड़

रॉय के करियर में कई ऐसे मौके आए जिन्होंने उनकी लीडरशिप सोच को मजबूत बनाया।

सबसे अहम अनुभवों में से एक कोविड-19 के समय का था, जब उन्होंने थायरोकेयर टेक्नोलॉजीज लिमिटेड के साथ मिलकर काम किया। सही मार्केटिंग और मजबूत तालमेल के जरिए, उन्होंने पूरे भारत में कोविड टेस्टिंग सेवाओं को बड़े स्तर पर बढ़ाने में मदद की। इस पहल के तहत देशभर में 15 लाख से ज्यादा टेस्ट किए गए और इससे 450 करोड़ रुपये से ज्यादा का राजस्व बना।

अपने करियर के शुरुआती दौर में, रेडियो सिटी 91.1 एफएम के साथ काम करते हुए उन्होंने बड़े स्तर के प्रोजेक्ट तैयार किए। उन्होंने गली प्रीमियर लीग और सुपर सिंगर जैसे आइडियाज को बनाया और सफल तरीके से लागू किया। गली प्रीमियर लीग के पहले सीजन में सात शहरों से 7,000 से ज्यादा टीमों ने हिस्सा लिया, जिससे लोगों की बड़ी भागीदारी हुई और लंबे समय तक विज्ञापन से कमाई के मौके बने।

रॉय ने मिर्ची 98.3 एफएम के लिए शुरुआती डिजिटल कंटेंट स्ट्रैटेजी बनाने में भी अहम भूमिका निभाई। फिल्मों के प्रमोशन और ब्रांडेड कंटेंट के जरिए उन्होंने यूट्यूब सब्सक्राइबर्स को 150 प्रतिशत तक बढ़ाया, जो आगे चलकर 70 लाख से ज्यादा हो गए। इससे ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के साथ काम करने के नए मौके भी बने और कंपनी के लिए नई कमाई के रास्ते खुले।

हेल्थकेयर, मीडिया और एंटरटेनमेंट जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में काम करते हुए, रॉय का यह भरोसा और मजबूत हुआ कि नई सोच तभी काम आती है जब उसे बड़े स्तर पर लागू किया जा सके, उसका असर मापा जा सके और वह बिज़नेस के लिए सही साबित हो।

सिनर्जी मारकॉम का विकास

2011 में, रॉय ने सिनर्जी मारकॉम की शुरुआत की। उनका मकसद सिर्फ एक सामान्य काम करने वाली एजेंसी बनाना नहीं था। वे एक ऐसी कंपनी बनाना चाहते थे जो डिजाइन, काम करने के तरीके और नतीजों को साथ लेकर चले।

शुरुआत में कंपनी ने ब्रांड्स के लिए ऐसे कैंपेन बनाए जहाँ लोग सीधे जुड़ सकें और ग्राउंड लेवल पर एक्टिविटी की जा सके। जैसे-जैसे कंपनी आगे बढ़ी, रॉय ने टीम की एक खास ताकत को पहचाना—डिजाइन और स्पेस के सही इस्तेमाल से ऐसा अनुभव बनाना जो लोगों को जोड़ सके।

क्लाइंट्स धीरे-धीरे कंपनी पर सिर्फ काम करने के लिए नहीं, बल्कि डिजाइन, एग्ज़िबिशन प्लानिंग और ब्रांड को सही तरीके से दिखाने के लिए भी भरोसा करने लगे। इस मौके को समझते हुए, कंपनी ने अपने इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजाइन टीम और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता में निवेश किया।

इस बदलाव के बाद, सिनर्जी मारकॉम एक ऐसी कंपनी बन गई जो एग्ज़िबिशन स्टॉल डिजाइन, 3डी कॉन्सेप्ट, रिटेल कैंपेन, कॉरपोरेट इवेंट्स और प्रोडक्ट लॉन्च जैसे कई काम एक साथ करती है।

इन सेवाओं के जरिए कंपनी ब्रांड्स को बेहतर पहचान बनाने, सही प्लानिंग करने, लोगों की भागीदारी बढ़ाने और शुरू से अंत तक सही तरीके से काम करने में मदद करती है।

आज, कंपनी मुंबई, दिल्ली एनसीआर, अहमदाबाद, बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद, पुणे और कोचिन जैसे बड़े शहरों में काम कर रही है। एक मजबूत टीम के साथ, 40 से ज्यादा शहरों में फैले नेटवर्क की मदद से यह कंपनी बड़े स्तर पर लगातार एक जैसा काम देने में सक्षम है।

स्ट्रैटेजी को पहले रखने का फायदा

इस इंडस्ट्री में अक्सर काम बिखरा हुआ होता है और कई बार फैसले सिर्फ कीमत के आधार पर लिए जाते हैं। ऐसे माहौल में, सिनर्जी मारकॉम ने अपनी पहचान भरोसेमंद और सही तरीके से काम करने वाली कंपनी के रूप में बनाई है।

रॉय हमेशा स्ट्रैटेजी को सबसे पहले रखते हैं। हर डिजाइन और हर फैसला इस बात को ध्यान में रखकर लिया जाता है कि ब्रांड की पहचान क्या है, लोगों तक कैसे पहुंचना है और बिज़नेस के क्या नतीजे चाहिए।

कंपनी की एक खास बात यह भी है कि यह हर खर्च को साफ तरीके से दिखाती है। इससे क्लाइंट्स को समझ आता है कि पैसा कहाँ और कैसे खर्च हो रहा है, और वे बेहतर फैसले ले पाते हैं। इससे पूरे प्रोजेक्ट में पैसे का सही हिसाब बना रहता है।

कंपनी ने ऐसे तय तरीके भी बनाए हैं जिनसे हर शहर में काम एक जैसा और समय पर हो सके। इससे क्वालिटी, समय और खर्च—तीनों पर कंट्रोल बना रहता है।

सालों में, सिनर्जी मारकॉम ने शुगर कॉस्मेटिक्स, गल्फ, वेगोफिन, सालासर टेक्नो, गोदरेज, टीपी-लिंक और एएसयूएस जैसे ब्रांड्स के साथ काम किया है।

रॉय कहते हैं, “हम खुद को सिर्फ काम करने वाले के रूप में नहीं देखते। हम ऐसे पार्टनर बनना चाहते हैं जो लंबे समय तक ब्रांड की ग्रोथ में साथ दें और क्रिएटिविटी के साथ बिज़नेस को भी समझें।”

ग्रोथ, उपलब्धियाँ और कंपनी का विस्तार

शुरुआत से लेकर अब तक, सिनर्जी मारकॉम ने लगातार और सही तरीके से आगे बढ़ते हुए कई अहम उपलब्धियाँ हासिल की हैं।

कंपनी ने भारत के बड़े ट्रेड प्लेटफॉर्म्स पर बड़े एग्ज़िबिशन प्रोजेक्ट्स किए हैं, जहाँ अलग-अलग शहरों में जटिल काम को सही तरीके से पूरा किया गया। इसके साथ ही, कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के लिए रिटेल ब्रांडिंग के बड़े प्रोजेक्ट्स भी किए गए, जिससे उनकी बाजार में पहचान मजबूत हुई।

एक और अहम उपलब्धि है 40 से ज्यादा शहरों में मजबूत नेटवर्क बनाना। इस नेटवर्क की मदद से कंपनी क्वालिटी बनाए रखते हुए, खर्च को कंट्रोल में रखते हुए और बड़े स्तर पर काम कर पाती है।

इसके साथ ही, कंपनी ने खुद को सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग तक सीमित नहीं रखा, बल्कि एक पूरी मार्केटिंग और कम्युनिकेशन कंपनी के रूप में विकसित किया। एग्ज़िबिशन, रिटेल, इवेंट्स और अनुभव से जुड़े काम को एक साथ जोड़कर कंपनी ने अपनी पहचान और मजबूत की है।

ये सभी उपलब्धियाँ दिखाती हैं कि कंपनी का ध्यान सिर्फ तेजी से बढ़ने पर नहीं, बल्कि सही तरीके से और लंबे समय तक टिके रहने वाले विकास पर है।

मजबूत टीम बनाना

सिनर्जी मारकॉम में लोगों को तैयार करने का तरीका तीन चीजों पर आधारित है—सीखने का मौका, जिम्मेदारी और आगे बढ़ने का रास्ता। टीम के लोग देश के बड़े ब्रांड्स और अलग-अलग शहरों में होने वाले बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम करते हैं, जिससे उन्हें कई तरह का अनुभव मिलता है।

रॉय कहते हैं, “लोग सिर्फ सैलरी के लिए नहीं रुकते। वे वहाँ रुकते हैं जहाँ उन्हें ग्रोथ, साफ दिशा और काम का मतलब समझ आता है।”

कंपनी में काम को मापने के लिए साफ तरीके बनाए गए हैं, जिससे हर किसी को पता रहता है कि उनसे क्या उम्मीद है। टीम के लोगों को प्रोजेक्ट्स, पार्टनर्स और क्लाइंट्स से सीधे जुड़ने की जिम्मेदारी दी जाती है, ताकि वे काम के हर पहलू को समझ सकें।

रॉय मानते हैं कि जब अच्छे लोग मजबूत सिस्टम के साथ काम करते हैं, तो काम बेहतर होता है और कंपनी ज्यादा मजबूत बनती है।

आगे का समय: ब्रांड अनुभव इंडस्ट्री का बदलता रूप

एग्ज़िबिशन और ब्रांड अनुभव से जुड़ा इंडस्ट्री अब तेजी से बदल रहा है। आने वाले समय में टेक्नोलॉजी, पर्यावरण का ध्यान और नतीजों को मापने की जरूरत और बढ़ेगी।

आने वाले सालों में कंपनियां चाहेंगी कि हर इवेंट से साफ बिज़नेस रिजल्ट निकले। इसके लिए डेटा के जरिए लीड ट्रैक करना, सीआरएम से जोड़ना और इवेंट के बाद का पूरा विश्लेषण करना जरूरी होगा।

इसके साथ ही, फिजिकल और डिजिटल का मिश्रण बढ़ेगा। एग्ज़िबिशन के साथ-साथ लाइव कंटेंट, सोशल मीडिया और डिजिटल पहुंच भी जुड़ी रहेगी।

पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए, ऐसे डिजाइन बढ़ेंगे जो दोबारा इस्तेमाल हो सकें और जिनमें कम सामग्री लगे। साथ ही, ऑटोमेशन और AI का इस्तेमाल डिजाइन, खर्च का अंदाजा लगाने और काम को तेज़ करने में होगा।

रॉय कहते हैं, “आने वाला समय उन्हीं कंपनियों का होगा जो क्रिएटिविटी के साथ अनुशासन, टेक्नोलॉजी के साथ सही काम और बड़े लक्ष्य के साथ साफ फाइनेंशियल सोच रखती हैं।”

कंपनी इस दिशा में पहले से काम कर रही है। यह डिजाइन सिस्टम, ऑटोमेशन टूल्स और AI आधारित तरीके अपनाने की कोशिश कर रही है। उनका लक्ष्य एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनाना है जो डिजाइन, प्लानिंग और खर्च का अंदाजा लगाने की प्रक्रिया को आसान बना दे।

लीडरशिप मंत्र

22 साल के अपने अनुभव में, रॉय ने लीडरशिप को एक साफ सोच के साथ समझा है—अनुशासन, पैसों की स्पष्टता और मुश्किल समय में टिके रहना। वह कहते हैं, “अनुशासन ही किसी बिज़नेस को लंबे समय तक चलाता है। क्रिएटिविटी ध्यान खींच सकती है, लेकिन बिज़नेस को टिकाए रखने के लिए अनुशासन जरूरी है। साफ तरीके, पैसों की समझ और लगातार सही काम ही लंबे समय का भरोसा बनाते हैं।”

वह यह भी कहते हैं कि बिज़नेस में पैसे का सही प्रबंधन बहुत जरूरी है। “कैश फ्लो हमेशा रेवेन्यू से ज्यादा जरूरी होता है। अगर पैसे पर कंट्रोल नहीं है, तो ग्रोथ भी अस्थिर हो जाती है। सही तरीके से बढ़ने के लिए मुनाफे पर ध्यान देना जरूरी है।”

उनकी सोच को एक लाइन में समझा जा सकता है—“कुछ लोग मानेंगे, कुछ नहीं मानेंगे—तो क्या हुआ, आगे बढ़ो।” उनके अनुसार, हर कोशिश सफल नहीं होती, लेकिन लगातार आगे बढ़ना ही असली ताकत है।

नए लोगों के लिए उनकी सलाह सीधी है—“क्रिएटिविटी के पीछे भागने से पहले बिज़नेस को समझो। खर्च कैसे काम करता है, पार्टनर्स के साथ रिश्ते कैसे बनते हैं और सिस्टम कैसे काम करता है—यह सब सीखो। टेक्नोलॉजी को जल्दी अपनाओ और साफ तरीके से काम करो।”

वह कहते हैं कि हर काम सफल नहीं होगा और कुछ क्लाइंट्स भी चले जाएंगे। लेकिन सीखते रहना और आगे बढ़ते रहना ही सबसे जरूरी है।

आगे की दिशा

जैसे-जैसे सिनर्जी मारकॉम अपने अगले चरण में बढ़ रही है, उसका फोकस एक मजबूत और बड़े स्तर पर काम करने वाली कंपनी बनाने पर है, जो सिस्टम, टेक्नोलॉजी और सही पार्टनरशिप पर चले।

रॉय का लंबी अवधि का लक्ष्य है भारत के एग्ज़िबिशन और ब्रांड अनुभव वाले इंडस्ट्री को बेहतर बनाना, जहाँ काम सही तरीके से हो और उसका असर साफ दिखे। वह कहते हैं, “हमारा लक्ष्य सिर्फ काम करने वाला पार्टनर बनना नहीं है, बल्कि इंडस्ट्री में एक ऐसा मानक बनाना है जिसे दूसरे फॉलो करें।”

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