E-Mail - Corporate@theceo.in | Desk No. - 011 - 4121 9292

डॉ. सिद्धा एससी चक्र राव: भारत में CPR को जन-आंदोलन बनाने वाले लीडर

Share

Unlock Exclusive Business Insights
CEO Interviews & Industry Analysis
RE DO
Harvish
P C Chandra
Dr Shailaja
RE DO
Harvish
P C Chandra
Dr Shailaja
RE DO
Subscribe Now

हर साल देश में हजारों लोगों की जान सिर्फ इसलिए चली जाती है क्योंकि समय पर मदद नहीं मिल पाती। पिछले कई दशकों से डॉ. सिद्धा एससी चक्र राव इस स्थिति को बदलने के लिए काम कर रहे हैं। उनका उद्देश्य हमेशा स्पष्ट रहा है—आम लोगों को जीवन बचाने वाली बुनियादी जानकारी और आत्मविश्वास देना, ताकि आपातकाल में वे तुरंत सही कदम उठा सकें।

इंडियन रिससिटेशन काउंसिल फेडरेशन (IRCF) के संस्थापक और चेयरमैन, केयर इमरजेंसी हॉस्पिटल, काकीनाडा के मैनेजिंग डायरेक्टर तथा एनेस्थीसियोलॉजी और रिससिटेशन साइंस के वरिष्ठ विशेषज्ञ के रूप में डॉ. राव ने भारत में CPR जागरूकता को एक राष्ट्रीय अभियान का रूप दिया है। उनकी सोच “हर नागरिक, एक जीवनरक्षक” (Every Citizen a Lifesaver) आज भी उनके हर प्रयास की दिशा तय करती है। इसी उद्देश्य के साथ एक मिलियन से अधिक लोगों को CPR का प्रशिक्षण दिया जा चुका है और जागरूकता अभियानों के जरिए करोड़ों लोगों तक यह संदेश पहुंचा है।


सेवा और चिकित्सा से जुड़ा सफर

डॉ. सिद्धा एससी चक्र राव का चिकित्सा क्षेत्र में सफर कई दशकों के अनुभव, सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा और पेशेवर नेतृत्व से जुड़ा रहा है। उन्होंने MBBS और एनेस्थीसियोलॉजी में डिप्लोमा (DA) किया है। इसके अलावा उन्हें फेलो ऑफ द इंडियन कॉलेज ऑफ एनेस्थीसियोलॉजिस्ट्स (FICA) और फेलो ऑफ द इंडियन मेडिकल एसोसिएशन एकेडमी ऑफ मेडिकल स्पेशियलिटीज (FIMAAMS) जैसी प्रतिष्ठित उपाधियां भी मिली हैं।

उन्होंने अपने करियर की शुरुआत आंध्र मेडिकल कॉलेज और किंग जॉर्ज हॉस्पिटल, विशाखापट्टनम में एनेस्थीसियोलॉजी के ट्यूटर के रूप में की। बाद में उन्होंने रंगाराया मेडिकल कॉलेज और गवर्नमेंट जनरल हॉस्पिटल, काकीनाडा में भी अपनी सेवाएं दीं। इसके बाद उन्होंने आंध्र प्रदेश की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।

उन्होंने पूर्वी गोदावरी और खम्मम जिलों में जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (District Medical and Health Officer) के रूप में काम किया। इसके बाद वह विशाखापट्टनम में क्षेत्रीय निदेशक (Regional Director of Medical and Health Services) और बाद में आंध्र प्रदेश में अतिरिक्त निदेशक (Additional Director of Medical and Health Services) भी रहे।

सरकारी सेवाओं के साथ-साथ वह चिकित्सा संस्थाओं और स्वास्थ्य विकास से जुड़े कई संगठनों में भी सक्रिय रहे। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (National Rural Health Mission) के सफल क्रियान्वयन में उनके योगदान के लिए उन्हें लगातार दो वर्षों तक राज्य स्तर पर सम्मानित किया गया।

पेशेवर संस्थाओं में नेतृत्व की भूमिका

डॉ. राव ने सिर्फ चिकित्सा सेवा तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की कई चिकित्सा संस्थाओं में भी महत्वपूर्ण नेतृत्व की जिम्मेदारियां निभाईं।

इंडियन सोसाइटी ऑफ एनेस्थीसियोलॉजिस्ट्स (ISA) के साथ उनका जुड़ाव कई वर्षों तक रहा। वह 2009 से 2011 तक राष्ट्रीय सचिव (National Secretary) रहे और 2014 में राष्ट्रीय अध्यक्ष (National President) चुने गए। इसी दौरान उन्होंने फैमिली बेनेवोलेंट फंड की शुरुआत की, ताकि दिवंगत ISA सदस्यों के परिवारों को आर्थिक सहायता मिल सके।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उनका योगदान लगातार बढ़ता गया। 2016 से 2024 तक वह वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ सोसाइटीज़ ऑफ एनेस्थीसियोलॉजिस्ट्स (WFSA) की संवैधानिक समिति (Constitutional Committee) के सदस्य रहे और संगठन के Ambassadors Group से भी जुड़े रहे।

इसके अलावा, उन्होंने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) की राष्ट्रीय स्थायी समिति (National Standing Committee on Resuscitation and CPR) के चेयरमैन के रूप में भी काम किया। वह Journal of Resuscitation के एडवाइजरी बोर्ड के सदस्य भी हैं, जहाँ रिससिटेशन और आपातकालीन चिकित्सा से जुड़े शोध कार्यों को दिशा देने में योगदान देते हैं।


भारत में CPR की मजबूत व्यवस्था तैयार करना

हालाँकि भारत में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार हो रहा था, लेकिन आम लोगों के बीच CPR की जानकारी बहुत सीमित थी। डॉ. राव ने इस कमी को जल्दी पहचान लिया। उनका मानना था कि जीवन बचाने का ज्ञान सिर्फ डॉक्टरों और अस्पतालों तक सीमित नहीं होना चाहिए। छात्र, शिक्षक, स्वयंसेवक और आम नागरिक भी आपात स्थिति में किसी की जान बचा सकते हैं।

इसी सोच के साथ 2017 में उन्होंने इंडियन रिससिटेशन काउंसिल की स्थापना की, जो बाद में इंडियन रिससिटेशन काउंसिल फेडरेशन (IRCF) के रूप में विकसित हुई।

इस संस्था का उद्देश्य भारत की जरूरतों के अनुसार CPR के मानक तैयार करना और पूरे देश में CPR प्रशिक्षण को बढ़ावा देना था। डॉ. राव के नेतृत्व में IRCF ने Compression Only Life Support (COLS), Basic Cardiopulmonary Life Support (BCLS) और Comprehensive Cardiopulmonary Life Support (CCLS) जैसे प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए। पहली बार भारत में CPR प्रशिक्षण के लिए एक व्यवस्थित और मानकीकृत ढांचा तैयार हुआ।

इन दिशानिर्देशों को Indian Journal of Anaesthesia में प्रकाशित किया गया और वे डॉक्टरों, प्रशिक्षकों और चिकित्सा संस्थानों के लिए महत्वपूर्ण संदर्भ सामग्री बने।

डॉ. राव ने कोविड-19 के दौरान CPR प्रोटोकॉल, आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली और CPR के प्रभावी उपयोग पर भी कई महत्वपूर्ण शोध और प्रकाशनों में योगदान दिया। उनके शोध Indian Journal of Anaesthesia, Journal of Anaesthesiology Clinical Pharmacology, Journal of Paediatric Critical Care, Resuscitation Plus और Journal of the American Heart Association जैसी प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं।

उनके लिए यह सिर्फ चिकित्सा अनुसंधान नहीं था, बल्कि भारत में CPR को एक मजबूत और भरोसेमंद व्यवस्था के रूप में स्थापित करने की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम था।

CPR जागरूकता को जन-आंदोलन बनाना

भारत में CPR को आम लोगों तक पहुँचाना सिर्फ नए दिशानिर्देश जारी करने से संभव नहीं था। इसके लिए प्रशिक्षण, जरूरी संसाधन और लगातार जागरूकता अभियान चलाना भी उतना ही जरूरी था। डॉ. राव ने इन तीनों पहलुओं पर एक साथ काम किया।

व्यावहारिक प्रशिक्षण को बढ़ावा देने के लिए 2018 में इंडियन रिससिटेशन काउंसिल ने देशभर में इंडियन सोसाइटी ऑफ एनेस्थीसियोलॉजिस्ट्स (ISA) की विभिन्न शाखाओं को 180 CPR मैनिकिन उपलब्ध कराए। इससे लोगों को सिर्फ सैद्धांतिक जानकारी ही नहीं, बल्कि CPR का अभ्यास करने का भी अवसर मिला।

उसी वर्ष World Restart A Heart Day के अवसर पर लगभग 2.5 लाख लोगों को CPR का प्रशिक्षण दिया गया। यह भारत के सबसे बड़े CPR जागरूकता अभियानों में से एक था और इसकी चर्चा अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक प्रकाशनों में भी हुई।

यह अभियान अगले वर्ष और भी बड़े स्तर पर पहुँचा। 2019 में लगभग 5 लाख छात्रों और आम नागरिकों को Compression Only Life Support (COLS) का प्रशिक्षण दिया गया, जबकि इस अभियान के जरिए 5 करोड़ से अधिक लोगों तक जागरूकता का संदेश पहुँचा। इस पहल को International Liaison Committee on Resuscitation (ILCOR) ने भी सराहा। उस वर्ष दुनिया भर में प्रशिक्षित लगभग 8 लाख लोगों में से 5 लाख लोग अकेले भारत से थे।

इसके बाद यह अभियान लगातार आगे बढ़ता रहा। IRCF के प्रकाशित आँकड़ों के अनुसार, 2021 में 10 लाख से अधिक, 2023 में 11.5 लाख से ज्यादा और 2024 में 11.7 लाख से अधिक लोगों को World Restart A Heart Day अभियानों के तहत CPR का प्रशिक्षण दिया गया। इससे भारत दुनिया के उन देशों में शामिल हो गया जहाँ CPR शिक्षा और जागरूकता के लिए सबसे बड़े प्रयास किए जा रहे हैं।

CPR प्रशिक्षण का दायरा विश्वविद्यालयों, स्कूलों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग कार्यक्रमों तक भी बढ़ा। राष्ट्रीय CPR दिवस के अवसर पर Lovely Professional University में 2,500 छात्रों को प्रशिक्षण दिया गया। यह कार्यक्रम पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की स्मृति को समर्पित था।

आज IRCF के प्रशिक्षण कार्यक्रम कश्मीर से कन्याकुमारी और सोमनाथ से मणिपुर तक देश के हर हिस्से में पहुँच चुके हैं। इसके अलावा SAARC देशों के विशेषज्ञों के साथ वेबिनार, संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से भी इस अभियान का विस्तार लगातार हो रहा है।


नीति और शिक्षा में बदलाव की पहल

डॉ. राव का उद्देश्य सिर्फ लोगों को CPR सिखाना नहीं था। वह चाहते थे कि जीवन बचाने की यह शिक्षा देश की औपचारिक शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था का स्थायी हिस्सा बने।

इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि तब मिली, जब नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने प्रथम वर्ष के मेडिकल छात्रों के फाउंडेशन कोर्स में Basic Life Support (BLS) प्रशिक्षण को शामिल किया। इस पहल के लिए इंडियन रिससिटेशन काउंसिल ने प्रशिक्षण सामग्री तैयार करने और उसके क्रियान्वयन में भी सहयोग दिया।

डॉ. राव का मानना है कि जीवन बचाने की शिक्षा बचपन से ही शुरू होनी चाहिए। इसी सोच के साथ IRCF ने CBSE के साथ मिलकर कक्षा 9 के पाठ्यक्रम में Basic Life Support को शामिल करने की दिशा में भी काम किया।

उनकी भविष्य की योजनाएँ और भी व्यापक हैं। वह चाहते हैं कि देशभर में CPR और रिससिटेशन ट्रेनिंग सेंटर स्थापित किए जाएँ। राष्ट्रीय राजमार्गों पर Stop the Bleed जैसी पहलों के साथ मिलकर आपातकालीन सहायता केंद्र विकसित हों। हर जिले में प्रशिक्षकों का नेटवर्क बनाया जाए और आशा कार्यकर्ताओं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, स्कूल शिक्षकों, साथ ही हर मेडिकल और डेंटल कॉलेज को CPR प्रशिक्षण केंद्र के रूप में विकसित किया जाए।

उन्होंने रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों, मॉल, सिनेमाघरों, व्यावसायिक भवनों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर Automated External Defibrillators (AEDs) लगाने की भी वकालत की है। साथ ही, इन AEDs की लोकेशन को डिजिटल मैप से जोड़ने का सुझाव दिया है, ताकि आपात स्थिति में लोग अपने आसपास उपलब्ध सबसे नजदीकी AED की जानकारी तुरंत प्राप्त कर सकें।

इसके अलावा, वह CPR का प्रशिक्षण प्राप्त स्वयंसेवकों का नेटवर्क तैयार करने, एम्बुलेंस के लिए ग्रीन कॉरिडोर, आवासीय परिसरों में आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली और भविष्य में ड्रोन के जरिए AED पहुँचाने जैसी तकनीकों के उपयोग का भी समर्थन करते हैं। यह तकनीक अभी परीक्षण के चरण में है, लेकिन दुनिया के कई देशों में इसके सफल प्रयोग हो चुके हैं और भारत में भी DGCA के दिशा-निर्देशों के तहत इसकी संभावनाओं पर काम किया जा रहा है।

वैश्विक मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व

डॉ. राव का योगदान सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रहा। वर्षों से उन्होंने एनेस्थीसियोलॉजी और रिससिटेशन साइंस से जुड़े कई बड़े अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व किया है।

2012 में उन्होंने अर्जेंटीना के ब्यूनस आयर्स में आयोजित World Congress of Anaesthesiology में भारत का प्रतिनिधित्व किया। इसके बाद 2014 में उन्हें Chinese Society of Anaesthesiologists ने चीन के चेंगदू में आयोजित राउंडटेबल सम्मेलन में आमंत्रित किया। बाद में उन्होंने Malaysian Anaesthesia Society में आमंत्रित विशेषज्ञ (Invited Faculty) के रूप में भी अपनी सेवाएँ दीं।

उन्होंने SAARC एनेस्थीसिया एसोसिएशन के विभिन्न सम्मेलनों में भी भाग लिया और International Liaison Committee on Resuscitation (ILCOR) की बैठकों में भारत का प्रतिनिधित्व किया। इनमें 2019 में दक्षिण अफ्रीका के केपटाउन में आयोजित बैठक भी शामिल है।

CPR जागरूकता और जन-शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए, 2022 में उन्हें ILCOR World Restart A Heart Committee में भारत का प्रतिनिधि नियुक्त किया गया।

साल 2025 में उन्होंने 14 वैज्ञानिकों के भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए नीदरलैंड्स के रॉटरडैम में आयोजित कार्यक्रम में भाग लिया, जहाँ ILCOR की नई गाइडलाइंस जारी की गईं। इन गाइडलाइंस को तैयार करने में उनका भी योगदान रहा।

इन अंतरराष्ट्रीय मंचों के जरिए उन्होंने न सिर्फ भारत के CPR अभियान को दुनिया के सामने रखा, बल्कि आपातकालीन चिकित्सा और CPR शिक्षा के क्षेत्र में वैश्विक सहयोग को भी मजबूत किया।


जीवनभर के मिशन को मिली पहचान

डॉ. राव के एनेस्थीसियोलॉजी, सार्वजनिक स्वास्थ्य और CPR शिक्षा के क्षेत्र में योगदान को देश की कई प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थाओं और संगठनों ने सम्मानित किया है।

उन्हें Indian Society of Anaesthesiologists का Prof. A.P. Singhal Lifetime Achievement Award, Indian Medical Association (IMA) का Dr. A.K.N. Sinha National Award और IMA Distinguished Services Award जैसे सम्मान मिल चुके हैं।

पूर्वी गोदावरी जिले में जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान National Rural Health Mission के सफल क्रियान्वयन के लिए उन्हें लगातार दो वर्षों तक राज्य स्तर पर सम्मानित किया गया।

उन्हें Indian Red Cross Society की सदस्यता बढ़ाने में योगदान के लिए आंध्र प्रदेश के राज्यपाल द्वारा स्वर्ण पदक (Gold Medal) भी प्रदान किया गया। इसके अलावा उन्होंने काकीनाडा समुद्र तट पर नारियल के पेड़ लगाने की पर्यावरणीय पहल के लिए एक लाख रुपये का योगदान भी दिया।

साल 2018 में भारत के तत्कालीन उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने CPR जागरूकता और रिससिटेशन शिक्षा में उनके योगदान के लिए उन्हें सम्मानित किया।

इसके बाद 2023 में काकीनाडा के चिकित्सा समुदाय ने उन्हें “CPR Man of India” की उपाधि देकर सम्मानित किया। यह सम्मान भारत में CPR जागरूकता को जन-आंदोलन बनाने और लाखों लोगों तक जीवन बचाने का कौशल पहुँचाने में उनके योगदान की पहचान है।


मिशन अब भी जारी है

आज, इंडियन रिससिटेशन काउंसिल फेडरेशन (IRCF) के चेयरमैन के रूप में डॉ. सिद्धा एससी चक्र राव पूरे भारत में CPR शिक्षा को और व्यापक बनाने के लिए लगातार काम कर रहे हैं। प्रशिक्षण कार्यक्रमों, शैक्षणिक संस्थानों के साथ साझेदारी और नीतिगत सुधारों के जरिए उनका प्रयास है कि जीवन बचाने का यह कौशल हर नागरिक तक पहुँचे।

भारत के लिए CPR दिशानिर्देश तैयार करने से लेकर देश के सबसे बड़े CPR जागरूकता अभियानों का नेतृत्व करने तक, उनका पूरा काम एक ही उद्देश्य के इर्द-गिर्द रहा है—जीवन बचाने की जानकारी हर नागरिक तक पहुँचाना।

इसी सोच ने उनके प्रयासों को भारत के सबसे बड़े जन-स्वास्थ्य जागरूकता अभियानों में से एक का रूप दिया है और आज भी उनका मिशन उसी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ रहा है।

Business Insights
CEO Interviews & Analysis
Subscribe Now
RE DO Jewellery
Harvish Jewels
P C Chandra
Dr Shailaja
RE DO Jewellery
Harvish Jewels
Join 50K+ Business Leaders

Read more

Latest