ऐसी इंस्टीट्यूशंस तैयार करना जो पीढ़ियों को दिशा दें
“किसी इंस्टीट्यूशन की असली पहचान बदलाव पर प्रतिक्रिया देने में नहीं, बल्कि उसे पहले से समझने और उसके लिए तैयार होने में होती है।”
Techno India Group की कहानी ईस्टर्न इंडिया के सबसे बड़े एजुकेशन इकोसिस्टम्स में से एक बनाने की महत्वाकांक्षा से शुरू नहीं हुई थी। इसकी शुरुआत एक सवाल से हुई थी।
1980 के दशक की शुरुआत में वेस्ट बंगाल में क्वालिटी प्राइवेट टेक्निकल एजुकेशन के अवसर बहुत कम थे। हर साल हजारों टैलेंटेड स्टूडेंट्स बेहतर अवसरों की तलाश में राज्य से बाहर चले जाते थे, जिससे लगातार ब्रेन ड्रेन बढ़ रहा था। जहाँ अधिकांश लोग इसे एक ऐसी हकीकत मानकर स्वीकार कर चुके थे जिसे बदला नहीं जा सकता, वहीं Satyam Roychowdhury और उनके भाई Goutam Roychowdhury ने इसमें बदलाव की एक संभावना देखी।
उस समय कंप्यूटर अभी भी लोगों के लिए एक नई चीज़ थे और स्टूडेंट्स के बीच टाइपिंग क्लासेज़ ज्यादा लोकप्रिय थीं। ऐसे समय में दोनों भाइयों ने एक ऐसे फ्यूचर की कल्पना की जिसमें डिजिटल लिटरेसी एक जरूरी लाइफ स्किल बन जाएगी। 1985 में उन्होंने Chinsurah में सिर्फ सात स्टूडेंट्स और एक कंप्यूटर के साथ Institute of Computer Engineers (India) (ICE(I)) की स्थापना की। यह पहल बंगाल के पहले अफोर्डेबल प्राइवेट कंप्यूटर ट्रेनिंग सेंटर की नींव बनी। एक छोटे से इनिशिएटिव के रूप में शुरू हुआ यह प्रयास जल्द ही एक ऐसे मूवमेंट में बदल गया जिसने पूरे राज्य में कंप्यूटर एजुकेशन को ज्यादा लोगों तक पहुँचाया और आगे चलकर Techno India Group का रूप लिया।
चार दशक से अधिक समय बाद भी वही विज़न उस इंस्टीट्यूशन को दिशा दे रहा है, जो अब एजुकेशन से कहीं आगे बढ़ चुका है। आज इसका इकोसिस्टम यूनिवर्सिटीज़, स्कूल्स, हेल्थकेयर, मीडिया, पब्लिशिंग, स्पोर्ट्स, हॉस्पिटैलिटी और फिलैंथ्रॉपी तक फैला हुआ है।
Mr. Roychowdhury लंबे समय से इस विश्वास के साथ आगे बढ़ते रहे हैं कि “क्वालिटी एजुकेशन कभी भी केवल मेट्रोपॉलिटन सिटीज़ तक सीमित एक प्रिविलेज नहीं होनी चाहिए।”
एजुकेशन से एक पूरे इकोसिस्टम तक
Satyam Roychowdhury के लिए एजुकेशन कभी केवल क्लासरूम तक सीमित नहीं रही। उनके लिए इसका अर्थ हमेशा ऐसी इंस्टीट्यूशंस तैयार करना रहा है जो अवसर पैदा करें, टैलेंट को नर्चर करें और कई पीढ़ियों तक समाज में योगदान दें।
चार दशकों से अधिक समय में Techno India Group एक व्यापक नेटवर्क के रूप में विकसित हुआ है, जिसमें 103 से अधिक कैंपसेज़, छह यूनिवर्सिटीज़, 20 से अधिक इंजीनियरिंग कॉलेजेज़, 35 से अधिक पब्लिक स्कूल्स, बिज़नेस स्कूल्स, आईटीआईज़ और एक मेडिकल कॉलेज शामिल हैं। यह नेटवर्क स्टूडेंट्स को किंडरगार्टन से पीएचडी तक एक सीमलेस एकेडमिक जर्नी उपलब्ध कराता है। इसके फ्लैगशिप इंस्टीट्यूशंस Techno India Group, Sister Nivedita University और Techno India University, Tripura के साथ यह इकोसिस्टम इंजीनियरिंग, मेडिसिन, मैनेजमेंट, लॉ, डिज़ाइन, मीडिया, आर्किटेक्चर, ह्यूमैनिटीज़ और इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज़ को इंडस्ट्री-ओरिएंटेड लर्निंग एनवायरनमेंट्स के साथ जोड़ता है।
इसका विज़न केवल एजुकेशन तक सीमित नहीं है। Aajkaal Publishers और Millennium Post के जरिए ग्रुप जर्नलिज़्म और इंटेलेक्चुअल डिस्कोर्स में योगदान देता है। मल्टी-स्पेशियलिटी हॉस्पिटल्स, स्पेशलाइज़्ड आई केयर और डेडिकेटेड विमेन्स हेल्थकेयर फैसिलिटीज़ सहित इसका बढ़ता हेल्थकेयर नेटवर्क क्लासरूम से बाहर भी लोगों की ज़िंदगी में बदलाव लाने की उसी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। हॉस्पिटैलिटी, स्पोर्ट्स, कल्चरल इनिशिएटिव्स और Satyam Roychowdhury Foundation इस फिलॉसफी को और मजबूत करते हैं कि मीनिंगफुल इंस्टीट्यूशंस को समाज में कई स्तरों पर योगदान देना चाहिए।
इन सभी को अलग-अलग वेंचर्स के रूप में देखने के बजाय Mr. Roychowdhury इन्हें आपस में जुड़े हुए इंस्टीट्यूशंस मानते हैं, जिनका कॉमन पर्पज़ नॉलेज, इनोवेशन और सोशल इम्पैक्ट के जरिए लॉन्ग-लास्टिंग वैल्यू तैयार करना है।
Mr. Roychowdhury के शब्दों में, “सक्सेस केवल स्केल से नहीं मापी जाती, बल्कि उस लॉन्ग-लास्टिंग इम्पैक्ट से मापी जाती है जो कोई इंस्टीट्यूशन तैयार करती है।”
कल के लिए सीखना
आज हायर एजुकेशन पहले से कहीं ज्यादा तेजी से बदल रही है। Mr. Roychowdhury के लिए रिलिवेंट बने रहने का अर्थ बदलाव आने के बाद प्रतिक्रिया देना नहीं, बल्कि उसे पहले से समझना है।
यही फिलॉसफी Techno India Group के एकेडमिक एक्सीलेंस के अप्रोच को आकार देती है, जहाँ ट्रेडिशनल एजुकेशन के साथ रिसर्च, एंटरप्रेन्योरशिप, इंडस्ट्री कोलैबोरेशन और ग्लोबल एक्सपोज़र को जोड़ा जाता है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, रोबोटिक्स, डेटा साइंस, बायोटेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी जैसे प्रोग्राम्स स्थापित डिसिप्लिन्स के साथ चलते हैं, ताकि स्टूडेंट्स ऐसी स्किल्स के साथ ग्रेजुएट हों जो टुमॉरोज़ इकोनॉमी के अनुरूप हों।
ग्लोबल कोलैबोरेशन इस विज़न का एक और महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, इटली, जापान, ऑस्ट्रेलिया, पोलैंड, थाईलैंड, साउथ अफ्रीका और कई अन्य देशों की यूनिवर्सिटीज़ के साथ एकेडमिक पार्टनरशिप्स रिसर्च, फैकल्टी एक्सचेंज और इंटरनेशनल लर्निंग के अवसर पैदा करती हैं और साथ ही ग्रुप के ग्लोबल आउटलुक को मजबूत करती हैं।
इसी के साथ कंटीन्यूअस करिकुलम अपग्रेड्स, टेक्नोलॉजी-इनेबल्ड क्लासरूम्स, स्पेशलाइज़्ड लैबोरेटरीज़, इनोवेशन हब्स और इंडस्ट्री पार्टनरशिप्स ग्रुप की इंस्टीट्यूशंस को स्टूडेंट्स और एम्प्लॉयर्स की बदलती जरूरतों के साथ लगातार विकसित होने में सक्षम बनाते हैं।
Mr. Roychowdhury स्पष्ट रूप से कहते हैं, “हम बदलाव को चुनौती के रूप में नहीं, बल्कि एक्सीलेंस को नए तरीके से परिभाषित करने के अवसर के रूप में देखते हैं।”
पर्पज़ के साथ लीडरशिप
इनोवेशन ने ग्रुप की ग्रोथ को आकार दिया है, लेकिन इसकी नींव आज भी एक्सेसिबिलिटी, एक्सीलेंस और इंस्टीट्यूशन बिल्डिंग पर टिकी हुई है।
Mr. Roychowdhury की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक मेट्रोपॉलिटन सिटीज़ से बाहर क्वालिटी स्कूल एजुकेशन को बढ़ाना रहा है। 2005 में स्थापित Techno India Group Public Schools के जरिए टेक्नोलॉजी-इनेबल्ड CBSE एजुकेशन, मॉडर्न लर्निंग एनवायरनमेंट्स और होलिस्टिक डेवलपमेंट को वेस्ट बंगाल के अलग-अलग जिलों तक पहुँचाया गया। यह उनके उस लंबे समय से चले आ रहे विश्वास को दर्शाता है कि जियोग्राफी कभी भी एजुकेशनल अवसर को तय नहीं करनी चाहिए।
यही फिलॉसफी ऑर्गनाइज़ेशन के टैलेंट को लेकर अप्रोच को भी दिशा देती है। फैकल्टी डेवलपमेंट, रिसर्च, इंडस्ट्री एंगेजमेंट और इंटरनेशनल कोलैबोरेशंस प्रोफेशनल ग्रोथ के लगातार अवसर पैदा करते हैं। साथ ही ऐसा कल्चर तैयार किया जाता है जहाँ एजुकेटर्स और प्रोफेशनल्स केवल किसी इंस्टीट्यूशन के एम्प्लॉयी नहीं, बल्कि एक साझा मिशन के पार्टनर्स बनते हैं।
ऑर्गनाइज़ेशन के कल्चर के बारे में Mr. Roychowdhury कहते हैं, “लोग हमारी सबसे बड़ी स्ट्रेंथ हैं। इंस्टीट्यूशंस आखिरकार वही लोग बनाते हैं जो उनके पर्पज़ पर विश्वास करते हैं।”
उनके योगदान को कई सम्मानों से भी पहचान मिली है। इनमें Edupreneur of the Year Award, India’s 100 Greatest Leaders, Asia One India’s Greatest Leaders Award, Chanakya Award, Gandhi Peace Award, Rashtriya Ratna Award और Pride of India Award शामिल हैं।
वह Accademia Albertina di Belle Arti di Torino, Italy से Maecenas (Patron of the Arts) के रूप में Honorary Academician की उपाधि प्राप्त करने वाले पहले भारतीय भी बने। यह सम्मान एजुकेशन, कल्चर और आर्ट्स में उनके योगदान को मान्यता देता है।
एक ऐसी विरासत जो लंबे समय तक कायम रहे
आगे देखते हुए Mr. Roychowdhury Techno India को एक ऐसे नेशनल ट्रांसफॉर्मेटिव नॉलेज इकोसिस्टम के रूप में देखते हैं, जिसकी मजबूत जड़ें ईस्टर्न इंडिया से आगे पूरे देश तक फैलें।
उनका फोकस मल्टीडिसिप्लिनरी एजुकेशन को विस्तार देने, ग्लोबल पार्टनरशिप्स को मजबूत करने और इमर्जिंग डिसिप्लिन्स में फ्यूचर-रेडी इकोसिस्टम्स तैयार करने पर बना हुआ है। साथ ही ग्रुप की हेल्थकेयर, स्पोर्ट्स, फैशन, स्किल डेवलपमेंट और कल्चरल इनिशिएटिव्स में मौजूदगी को भी आगे बढ़ाने की दिशा में काम जारी है।
इस एक्सपैंशन के केंद्र में एक सरल फिलॉसफी है—इंस्टीट्यूशंस को ऐसे अवसर पैदा करने चाहिए जो उनके फाउंडर्स से भी ज्यादा लंबे समय तक कायम रहें।
यही विश्वास Mr. Roychowdhury के एक राइटर के रूप में काम को भी परिभाषित करता है। लिटरेचर, ट्रैवल, हिस्ट्री और बायोग्राफीज़ पर आधारित बेस्टसेलिंग इंग्लिश और बंगाली किताबों के जरिए उन्होंने बोर्डरूम से बाहर भी नॉलेज, कल्चर और ह्यूमन पोटेंशियल को सामने लाने का काम जारी रखा है।
एस्पायरिंग एंटरप्रेन्योर्स के लिए उनकी सलाह आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी उस समय थी जब Techno India की शुरुआत सात स्टूडेंट्स और एक कंप्यूटर से हुई थी: मीनिंगफुल अवसरों को पहचानिए, कंटीन्यूअस लर्निंग को अपनाइए, रेज़िलिएंट बने रहिए और पर्पज़ के साथ निर्माण कीजिए।
अपनी एंटरप्रेन्योरियल फिलॉसफी को समेटते हुए Mr. Roychowdhury कहते हैं, “एंटरप्रेन्योरशिप केवल सक्सेसफुल बिज़नेसेज़ बनाने के बारे में नहीं है; यह एंड्यूरिंग वैल्यू तैयार करने और नेशन-बिल्डिंग में योगदान देने के बारे में है।”
क्योंकि बिज़नेसेज़ सफल हो सकते हैं, लेकिन इंस्टीट्यूशंस विरासत छोड़ती हैं।
