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श्रीजी हुजूर डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़

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हाउस ऑफ मेवाड़ के 77वें संरक्षक, जो 1,500 वर्ष पुरानी आध्यात्मिक विरासत को संजोते हुए वैश्विक हॉस्पिटैलिटी व्यवसाय का नेतृत्व कर रहे हैं

मेवाड़ राजघराने में नेतृत्व का मतलब इतिहास का मालिक होना नहीं, बल्कि उसकी जिम्मेदारी निभाना है। द लेक पैलेस होटल्स एंड मोटेल्स प्राइवेट लिमिटेड के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर, श्रीजी हुजूर डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ इसी सोच के साथ अपनी भूमिका निभाते हैं। उनके लिए नेतृत्व तीन मूल सिद्धांतों पर आधारित है—सेवा, सुराज और संरक्षण।

मेवाड़ के 77वें संरक्षक (Custodian) और श्री एकलिंगनाथ जी के दीवान के रूप में वे खुद को किसी विरासत के मालिक नहीं, बल्कि उसके संरक्षक मानते हैं। उनका विश्वास है कि मेवाड़ केवल राजपरिवार की धरोहर नहीं, बल्कि पूरी मानवता की साझा विरासत है।

उनके नेतृत्व में हाउस ऑफ मेवाड़ और इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड (IHCL) के बीच छह दशक पुरानी साझेदारी आज भी मजबूती से आगे बढ़ रही है। यह भारत के निजी क्षेत्र की सबसे लंबे समय तक चलने वाली कारोबारी साझेदारियों में से एक मानी जाती है।

आतिथ्य क्षेत्र के साथ-साथ डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ का विशेष ध्यान दो विषयों पर है, जिन्हें वह अपने जीवन के “दो सबसे महत्वपूर्ण E” कहते हैं—Education (शिक्षा) और Environment (पर्यावरण)। इन्हीं क्षेत्रों में उनके सामाजिक अभियानों को अब तक 10 गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स से सम्मानित किया जा चुका है।

TCM: आज के समय में हाउस ऑफ मेवाड़ की विरासत को आगे बढ़ाना आपके लिए व्यक्तिगत रूप से क्या मायने रखता है?

डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़:
हम सभी अपने परिवार की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए जन्म लेते हैं। निश्चित रूप से, हाउस ऑफ मेवाड़ के 77वें संरक्षक (Custodian) के रूप में यह जिम्मेदारी कहीं अधिक बड़ी है और मेरे लिए गर्व और सम्मान की बात है।

मेवाड़ के आराध्य देव, परमेश्वरजी महाराज श्री एकलिंगनाथ जी के दीवान के रूप में हमारा कर्तव्य है कि हम अपने दायित्व पूरी निष्ठा से निभाएँ, आत्मनिर्भर और स्वतंत्र रहें, तथा जाति, धर्म या लिंग के भेदभाव के बिना सभी लोगों की सेवा करें। हमारा इतिहास बहुत पुराना है और स्वाभाविक रूप से उसका सम्मान करना, उसे संजोकर रखना और सबके साथ साझा करना हमारी जिम्मेदारी है। मेवाड़ हमारा नहीं है, यह पूरी मानवता की धरोहर है।

हमारे पूर्वज हमेशा कहते आए हैं कि “हम सेवा करने के लिए हैं।” यही विचार प्राचीन समय से लेकर आज तक मेवाड़ की सबसे बड़ी पहचान रहा है। मानव सेवा और आत्मनिर्भर तथा स्वतंत्र बने रहना हमारे लिए समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। संक्षेप में कहूँ तो हमारी सोच तीन शब्दों में समाई है—सेवा, सुराज और संरक्षण।

TCM: हाउस ऑफ मेवाड़ दुनिया की सबसे प्राचीन जीवित राजवंश परंपराओं में से एक है। इस विरासत के बीच आपका बचपन बीता। इसने जिम्मेदारी और नेतृत्व को लेकर आपकी सोच को किस तरह आकार दिया?

डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़:
हाउस ऑफ मेवाड़ में मेरा बचपन भी किसी सामान्य परिवार की तरह ही बीता। मेरे माता-पिता—स्वर्गीय महाराणा अरविंद सिंह मेवाड़ और राजमाता विजयराज कुमारी मेवाड़—ने मुझे विशेष अवसर तो दिए, लेकिन हमेशा जमीन से जुड़कर रहना भी सिखाया। उन्होंने सिखाया कि अपने आसपास के लोगों को समझो, उनसे सीखो और उनके प्रति संवेदनशील रहो। इसी सोच ने मुझे जीवन में आगे बढ़ाया। मैंने सिर्फ जीवन नहीं जिया, बल्कि उसे समझने और हर अनुभव से सीखने की कोशिश की।

हमारी विरासत केवल राजशाही तक सीमित नहीं है। यह आध्यात्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़ी एक व्यापक धरोहर है।

“एक इंद्रनील है, अद्भुत भी, गहरा भी।”

हम आज भी हर दिन, हर व्यक्ति से कुछ न कुछ सीखते रहते हैं।

TCM: क्या आपके परिवार के इतिहास से मिले कुछ ऐसे सबक या मूल्य हैं, जो आज भी आपके हर निर्णय का मार्गदर्शन करते हैं?

डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़:
अगर मेवाड़ के मूल्यों और हमारी सोच पर बात शुरू करें, तो उस पर पूरा एक अलग सत्र हो सकता है। फिलहाल इतना कहना काफी होगा कि मानव सेवा, आत्मनिर्भरता और स्वतंत्रता हमारे सबसे बड़े मार्गदर्शक सिद्धांत हैं। यही वे मूल्य हैं जिनका हम हमेशा पालन करते हैं। यह सिर्फ इतिहास का एक अध्याय नहीं, बल्कि मेवाड़ की जीवंत विरासत है।

मैं मेवाड़ के अनेक महाराणाओं के योगदान से भली-भांति परिचित हूँ। महाराणा कुंभा, महाराणा सांगा और महाराणा प्रताप जैसे महान व्यक्तित्व केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया के इतिहास की महत्वपूर्ण धरोहर हैं।

हाल ही में, 14 मार्च 2026 को हमने उदयपुर के शिव निवास पैलेस में महाराणा भीम सिंह और कर्नल जेम्स टॉड की प्रतिमाओं का अनावरण किया। महाराणा भीम सिंह ने ब्रिटिश एजेंट के साथ मिलकर उस समय मेवाड़ को कई कठिन परिस्थितियों से बाहर निकाला था। उनके जीवन से आज भी सुशासन और नेतृत्व के कई महत्वपूर्ण सबक सीखे जा सकते हैं।

TCM: जब आप सिसोदिया वंश की विरासत को देखते हैं, तो आपको क्या लगता है कि आज के समय में उसकी कौन-सी बातें सबसे अधिक प्रासंगिक हैं?

डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़:
मेरे लिए इस विरासत का हर पहलू महत्वपूर्ण और प्रासंगिक है। हम अपने अतीत की उपलब्धियों को आज के समय से जोड़कर आगे बढ़ते हैं। चाहे आध्यात्मिकता हो, शिक्षा, आतिथ्य, खेल या पर्यावरण संरक्षण—ये सभी आज भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं जितने पहले थे।

मुझे गर्व है कि इन सभी क्षेत्रों में मेवाड़ का योगदान हमेशा उल्लेखनीय रहा है।

अगर शिक्षा की बात करें, तो उदयपुर में 1864 में लड़कियों के लिए पहला माध्यमिक विद्यालय स्थापित किया गया था। यह आज से 160 वर्ष से भी पहले की बात है। उस समय मेरे पूर्वज महाराणा शंभू सिंह जी ने बालिका शिक्षा को प्राथमिकता दी और उसी के नाम पर इस विद्यालय की स्थापना हुई। आज यह विद्यालय राजस्थान सरकार के अधीन है, लेकिन हम आज भी इसके विकास और सहयोग के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।

TCM: एक ऐतिहासिक विरासत के संरक्षक होने के नाते, आप परंपराओं का सम्मान करते हुए बदलावों को किस तरह अपनाते हैं?

डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़:
मेरे लिए जीवन परंपरा और बदलाव में बंटा हुआ नहीं है। यह एक बहती हुई नदी की तरह है, जिसमें अलग-अलग धाराएँ और लहरें साथ-साथ चलती हैं।

यह हमें पुराने और नए, बड़े और छोटे—हर तरह के अनुभवों को साथ लेकर आगे बढ़ना सिखाता है। जीवन का उद्देश्य सिर्फ यह साबित करना नहीं है कि क्या पुराना है और क्या नया, बल्कि लगातार सीखना, बेहतर बनना और आगे बढ़ना है। हमें आज को पूरी तरह अपनाना चाहिए।

बदलाव प्रकृति का नियम है। लेकिन एक संरक्षक होने के नाते मेरी जिम्मेदारी है कि हाउस ऑफ मेवाड़ की परंपराएँ और रीति-रिवाज हमेशा जीवित रहें।

TCM: पिछले छह दशकों में मेवाड़ राजपरिवार ने अपनी शाही विरासत को दुनिया भर में सराही जाने वाली हॉस्पिटैलिटी का हिस्सा कैसे बनाया?

डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़:
द लेक पैलेस होटल्स और HRH ग्रुप ऑफ होटल्स की कहानी वास्तव में बहुत दिलचस्प है। इसकी शुरुआत 1960 के दशक की शुरुआत में हुई थी और यह सफर आज भी जारी है।

मेरे दादाजी, स्वर्गीय महाराणा भगवत सिंह जी ने उस समय एक दूरदर्शी फैसला लिया। उन्होंने जग निवास को लेक पैलेस होटल में बदलने का निर्णय लिया। उस दौर में यह एक साहसिक कदम था, क्योंकि उन्होंने बहुत पहले ही समझ लिया था कि पर्यटन के माध्यम से ऐतिहासिक महलों और धरोहरों को सुरक्षित रखा जा सकता है।

इसके बाद 1971 में उन्होंने ताज ग्रुप ऑफ होटल्स के साथ साझेदारी की। उनका उद्देश्य सिर्फ एक होटल चलाना नहीं था, बल्कि उदयपुर को विश्वस्तरीय पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित करना था।

समय के साथ इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड (IHCL) के साथ यह साझेदारी और मजबूत होती गई। 2021 में हमने लेक पैलेस होटल और HRH ग्रुप ऑफ होटल्स के 50 वर्ष पूरे होने का जश्न मनाया। उस अवसर पर टाटा संस के चेयरमैन श्री एन. चंद्रशेखरन उदयपुर आए। उन्होंने लेक पैलेस की अद्भुत वास्तुकला, उसकी ऐतिहासिक विरासत और स्वर्गीय महाराणा अरविंद सिंह मेवाड़ द्वारा IHCL पर जताए गए विश्वास की सराहना की।

आज यह साझेदारी अपने छठे दशक में प्रवेश कर चुकी है और इसे भारत के निजी क्षेत्र की सबसे लंबे समय तक चलने वाली कारोबारी साझेदारियों में से एक माना जाता है।

उदयपुर के ताज फतेह प्रकाश पैलेस और जैसलमेर के ताज गोरबंध पैलेस के साथ हम इस साझेदारी को आगे बढ़ा रहे हैं। IHCL की प्रबंधन क्षमता और वैश्विक पहुंच का लाभ उठाते हुए हम उदयपुर और पूरे राजस्थान को विश्वस्तरीय हॉस्पिटैलिटी डेस्टिनेशन के रूप में और मजबूत बनाने के लिए काम कर रहे हैं।

हॉस्पिटैलिटी हमारे दिल के बहुत करीब है। लेक पैलेस होटल्स एंड मोटेल्स प्राइवेट लिमिटेड ने हेरिटेज हॉस्पिटैलिटी के क्षेत्र में हमेशा नई दिशा दिखाई है। डेस्टिनेशन मार्केटिंग से लेकर शाही शादियों तक, मेरे पिता स्वर्गीय महाराणा अरविंद सिंह मेवाड़ के नेतृत्व में हमने कई नई पहल कीं। आज हमारा पूरा समूह भविष्य की योजनाओं पर काम करते हुए अपने कारोबार को और मजबूत बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

TCM: आधुनिक हॉस्पिटैलिटी बिज़नेस चलाने के साथ-साथ ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण कैसे सुनिश्चित करते हैं?

डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़:
यह एक संतुलन बनाने का काम है और हर दिन एक नई चुनौती भी। हमें लगातार यह सुनिश्चित करना होता है कि हमारे हेरिटेज होटल और ऐतिहासिक स्थल अच्छी तरह संरक्षित रहें।

इसके लिए हमारे पास अनुभवी विशेषज्ञों की अपनी टीम है और जरूरत पड़ने पर बाहरी विशेषज्ञों की सलाह भी ली जाती है। वे हर स्तर पर हमारा मार्गदर्शन करते हैं।

हमारे पैलेस होटल और हेरिटेज स्थल आज भी मेहमानों को “राजाओं की धरती पर असली शाही अनुभव” (Experience the Original in the Abode of Kings) देने के लिए जाने जाते हैं।

साथ ही, उदयपुर और द लेक पैलेस होटल्स एंड मोटेल्स प्राइवेट लिमिटेड आज भी फिल्म निर्माताओं और इवेंट मैनेजमेंट कंपनियों की पहली पसंद बने हुए हैं। वे अपनी फिल्मों और आयोजनों के माध्यम से उदयपुर की अनोखी विरासत और खूबसूरती को दुनिया के सामने पेश करना चाहते हैं।

TCM: आपके अनुसार, राजस्थान की विरासत दुनिया भर के पर्यटकों को इतना आकर्षित क्यों करती है?

डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़:
उदयपुर और राजस्थान की सबसे बड़ी ताकत इसकी मौलिकता (Authenticity) है। यहाँ जो अनुभव मिलता है, उसकी तुलना दुनिया के किसी और स्थान से नहीं की जा सकती।

हमारे महल, हेरिटेज होटल, अभयारण्य, हवेलियाँ, प्राचीन मंदिर और ऐतिहासिक किले—दुनिया में बहुत कम जगहें हैं जहाँ लोग एक साथ इतनी समृद्ध और जीवंत विरासत का अनुभव कर सकते हैं।

राजस्थान के रंग, संस्कृति और परंपराएँ इतनी विविध और आकर्षक हैं कि वे आज भी दुनिया भर से आने वाले लोगों को अपनी ओर खींचती हैं।

हाँ, चुनौती हमेशा यही रहती है कि हम लगातार खुद को बेहतर बनाते रहें, नए अनुभव जोड़ते रहें और भारतीय तथा विदेशी पर्यटकों को सीखने और महसूस करने के नए अवसर देते रहें।

TCM: स्मारकों और महलों से आगे बढ़कर, हाउस ऑफ मेवाड़ जीवित विरासत (Living Heritage) को संरक्षित करने के लिए क्या करता है?

डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़:
यह भी ऐसा विषय है, जिस पर अलग से पूरा सत्र हो सकता है।

हमारे लिए ‘लिविंग हेरिटेज’ यानी जीवित विरासत का मतलब सिर्फ इमारतों को सुरक्षित रखना नहीं है, बल्कि उन परंपराओं, विचारों और मूल्यों को जीवित रखना भी है, जो समाज को जोड़ते हैं।

इसी सोच के तहत समय-समय पर उदयपुर में राजनयिकों, शिक्षाविदों, वास्तु विशेषज्ञों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, कलाकारों और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को एक साथ लाया जाता है।

सम्मेलनों, कार्यशालाओं और संवाद के विभिन्न मंचों के माध्यम से हम अलग-अलग विचारों को जोड़ने और इस विषय पर सार्थक चर्चा को आगे बढ़ाने का प्रयास करते हैं।

“बहुत लंबा सफर तय किया है हमने उदयपुर में।”

TCM: उदयपुर का सिटी पैलेस जैसे संस्थान नई पीढ़ी को अपनी विरासत से जोड़ने में क्या भूमिका निभा रहे हैं?

डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़:
इस सवाल का जवाब शब्दों में देना आसान नहीं है। इसका असली जवाब आपको उदयपुर आकर हमारे संग्रहालय (Museum) में मिलेगा।

यहाँ युवा और बच्चे विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से मेवाड़ की जीवित विरासत को करीब से समझते हैं। वे सीखते भी हैं, आनंद भी लेते हैं और इतिहास को एक नए नजरिए से देखने का अवसर भी पाते हैं।

हमारी शस्त्रागार (Arms & Armour), चित्रकला और ऐतिहासिक फोटोग्राफ की गैलरियाँ युवाओं के लिए ज्ञान का खजाना हैं। यहाँ वे इन धरोहरों की सुंदरता, इतिहास और महत्व को करीब से समझ सकते हैं।

TCM: समाज की भलाई हमेशा से मेवाड़ की परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। कौन-से सामाजिक कार्य आपके सबसे करीब हैं?

डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़:
मेरे दिल के सबसे करीब आज भी दो ‘E’ हैं—Environment (पर्यावरण) और Education (शिक्षा)

यह मेरे लिए गर्व की बात है कि 2019 से अब तक इन दोनों क्षेत्रों में चलाए गए हमारे सामाजिक अभियानों को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स द्वारा 10 विश्व रिकॉर्ड से सम्मानित किया गया है।

आपके पाठकों को प्रेरित करने के लिए मैं कुछ उदाहरण साझा करना चाहूँगा।

‘वस्त्र दान’ अभियान की शुरुआत एक छोटे से प्रयास के रूप में हुई थी, जिसका उद्देश्य जरूरतमंद लोगों तक पुराने लेकिन उपयोगी कपड़े पहुँचाना था। धीरे-धीरे यह अभियान पूरे भारत और कई अन्य देशों तक फैल गया। 9 मार्च 2019 तक इस अभियान के तहत 3,29,250 से अधिक कपड़े एकत्र किए गए।

इस अभियान में 120 से अधिक स्कूल, 15 कॉलेज और लगभग 30 गैर-सरकारी संस्थाओं (NGOs) ने भाग लिया। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, ओमान, श्रीलंका और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) सहित 12 देशों से भी लोगों ने कपड़े भेजकर इस अभियान का हिस्सा बने।

इसके बाद हमने 24 घंटे के भीतर सबसे अधिक स्कूल सामग्री दान करने का अभियान चलाया, जिसके लिए हमें दूसरा गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड मिला।

यह अभियान ‘शिक्षा प्रोत्साहन अभियान’ के नाम से शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य उन हजारों बच्चों तक पढ़ाई का जरूरी सामान पहुँचाना था, जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत थी। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने इसे समाज के लिए प्रेरणादायक और महत्वपूर्ण अभियान के रूप में सम्मानित किया।

साल 2020 में हमने ‘वृक्ष ही जीवन अभियान’ के तहत ‘गो ग्रीन’ पहल शुरू की। इस अभियान में उदयपुर में 4,035 लोगों ने एक मिनट से भी कम समय में एक साथ पौधे लगाए, जिससे एक नया विश्व रिकॉर्ड बना।

TCM: आपके अनुसार, शिक्षा सामाजिक बदलाव का सबसे प्रभावशाली माध्यम क्यों है?

डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़:
जैसा कि मैंने पहले भी कहा, मेवाड़ ने हमेशा शिक्षा को, विशेष रूप से बालिका शिक्षा को, प्राथमिकता दी है।

1864 में रखी गई यह नींव आज भी हमारे काम को दिशा देती है।

शिक्षा लोगों को सशक्त बनाती है, समाज को मजबूत करती है और विकास का सबसे मजबूत आधार तैयार करती है। इसलिए हमारे लिए शिक्षा आज भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी पहले थी।

TCM: आपके अनुसार, भारत की वैश्विक पहचान को मजबूत करने में हमारी विरासत और संस्कृति की क्या भूमिका है?

डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़:
बिलकुल, हमारी संस्कृति और विरासत ही हमारी असली पहचान है। यही भारत की सबसे बड़ी ताकत (USP) भी है। देश के हर राज्य की जिम्मेदारी है कि वह अपनी संस्कृति और विरासत को वह महत्व दे जिसकी वह हकदार है।

हमारी आध्यात्मिक विरासत, मंदिर, तीर्थ स्थल, किले और पैलेस होटल दुनिया में अपनी तरह के अनोखे हैं। जैसा कि मैंने पहले कहा, चुनौती सिर्फ इन्हें बचाए रखने की नहीं है, बल्कि समय के साथ इन्हें और बेहतर बनाते हुए लगातार आगे बढ़ने की भी है।

मुझे खुशी है कि हमारे माननीय केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत जी भारत के पर्यटन क्षेत्र को नई गति देने का काम कर रहे हैं। मैं उनके प्रयासों को नमन करता हूँ।

TCM: जीवन में कौन-से व्यक्तिगत मूल्य आपके विचारों और फैसलों का मार्गदर्शन करते हैं?

डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़:
जीवन एक ही बार मिलता है। हमारे जीवन में वास्तव में कुछ भी निजी नहीं है, क्योंकि हमारा हर काम और हर कार्यक्रम समाज से जुड़ा होता है।

इसलिए मेरा मानना है कि हर व्यक्ति के साथ हर समय सम्मान और गरिमा के साथ व्यवहार करना चाहिए।

बस यही सबसे बड़ा सिद्धांत है। मेवाड़ की परंपरा में सम्मान और आदर सबसे ऊपर हैं।

TCM: आगे आने वाले वर्षों में हाउस ऑफ मेवाड़ और उससे जुड़े संस्थानों के लिए आपका दीर्घकालिक विज़न क्या है? आप अगली पीढ़ी के लिए कैसी विरासत छोड़ना चाहते हैं?

डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़:
मैंने अप्रैल 2025 में ही महाराणा का दायित्व संभाला है, इसलिए अभी यह कहना जल्दबाज़ी होगी कि मैं अपने पीछे कैसी विरासत छोड़ना चाहता हूँ।

फिलहाल मेरा पूरा ध्यान इस बात पर है कि मेवाड़ की विरासत जीवित रहे और हम हर स्तर पर देश के श्रेष्ठ संस्थानों और विशेषज्ञों के साथ मिलकर काम करें।

मेरा उद्देश्य उदयपुर और पूरे राजस्थान को नई दिशा देना और यहाँ उत्कृष्टता के नए केंद्र (Centres of Excellence) विकसित करना है।

TCM: अगर आपको एक वाक्य में मेवाड़ की आत्मा का वर्णन करना हो, तो आप क्या कहेंगे?

डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़:
सम्मान और आदर। जैसा कि हमारे आदरणीय कवि स्वर्गीय पंडित नरेंद्र मिश्रा जी ने मेवाड़ के बारे में कहा था—

“यश की धरोहर है।”

TCM: इस बातचीत के अंत में, अगर हम आपके नेतृत्व को एक विचार में समझें, तो वह क्या होगा?

डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़:
मेरे लिए विरासत कोई बीता हुआ इतिहास नहीं, बल्कि एक जीवित जिम्मेदारी है। परंपराओं का सम्मान करते हुए वर्तमान के साथ आगे बढ़ना ही नेतृत्व का सही अर्थ है।

इसी सोच के साथ हाउस ऑफ मेवाड़ आज भी केवल इतिहास की निशानी बनकर नहीं, बल्कि एक जीवंत संस्था के रूप में आगे बढ़ रहा है, जो अपनी मूल पहचान और मूल्यों को संजोते हुए समय के साथ निरंतर आगे बढ़ रही है।


इस बातचीत के बाद यह स्पष्ट हो जाता है कि श्रीजी हुजूर डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ के लिए विरासत केवल इतिहास की धरोहर नहीं, बल्कि एक जीवंत जिम्मेदारी है। सदियों पुरानी परंपराओं में गहराई से जुड़े होने के साथ-साथ उनकी सोच आज के समय की जरूरतों के अनुरूप भी है। उनके नेतृत्व की नींव सेवा, अनुशासन और निरंतरता पर टिकी है।

इसी दृष्टिकोण के साथ हाउस ऑफ मेवाड़ आज केवल इतिहास का प्रतीक बनकर नहीं, बल्कि एक जीवंत संस्था के रूप में आगे बढ़ रहा है। अपनी मूल पहचान और मूल्यों को संजोए रखते हुए, यह बदलते समय के साथ कदम मिलाकर भविष्य की ओर बढ़ रहा है।

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