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भारत के व्हाइट-लेबल वॉटर इंडस्ट्री के लिए नया प्लेबुक तैयार करना

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Oceana Positive में Satish Naidu Karna कस्टमाइज़ेशन, इनोवेशन और डिस्ट्रीब्यूशन को जोड़कर एक नई कैटेगरी को बड़े स्तर पर आगे बढ़ा रहे हैं।

कई दशकों तक पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर इंडस्ट्री एक अपेक्षाकृत सरल आधार पर काम करती रही। कंज़्यूमर्स को सुरक्षित और भरोसेमंद पीने का पानी चाहिए था, बिज़नेसेज़ का फोकस उपलब्धता और डिस्ट्रीब्यूशन पर था और ब्रांड्स मुख्य रूप से स्केल, रीच और विज़िबिलिटी के आधार पर प्रतिस्पर्धा करते थे। पानी एक जरूरी प्रोडक्ट था, लेकिन शायद ही कभी इसे स्ट्रैटेजिक प्रोडक्ट के रूप में देखा जाता था।

आज, हालांकि, इंडस्ट्री में एक शांत लेकिन महत्वपूर्ण बदलाव हो रहा है। बढ़ती हेल्थ अवेयरनेस, हाइजीन पर बढ़ता ध्यान, बढ़ती परचेज़िंग पावर और बदलती कंज़्यूमर एक्सपेक्टेशन्स लोगों के पानी के साथ जुड़ने के तरीके को बदल रही हैं। दूसरी ओर, बिज़नेसेज़ कस्टमर्स से जुड़ने, ब्रांड रिकॉल मजबूत करने और अलग एक्सपीरियंस बनाने के लिए ज्यादा पर्सनलाइज़्ड तरीकों की तलाश कर रहे हैं। ये बदलाव ट्रेडिशनल पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर से आगे कस्टमाइज़ेशन, प्रीमियमाइज़ेशन, स्पेशलाइज़्ड वॉटर कैटेगरीज़ और इनोवेटिव डिस्ट्रीब्यूशन मॉडल्स के लिए नए अवसर पैदा कर रहे हैं।

इंडस्ट्री एस्टिमेट्स के अनुसार, भारत की पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर इंडस्ट्री, जिसकी वर्तमान वैल्यू लगभग ₹50,000 करोड़ है, करीब 12 प्रतिशत CAGR की दर से बढ़ने की उम्मीद है और 2034 तक लगभग ₹2.5 लाख करोड़ तक पहुँच सकती है। ये आंकड़े इस अवसर के स्केल को दिखाते हैं और ऐसी ग्रोथ उन कंपनियों के लिए जगह बना रही है जो ट्रेडिशनल अप्रोच पर दोबारा सोचने और उभरती मार्केट नीड्स के अनुसार सॉल्यूशंस तैयार करने के लिए तैयार हैं।

ऐसी ही कंपनियों में से एक है Oceana Positive2013 में सिर्फ एक क्लाइंट और केवल 20 बोतलों के ऑर्डर के साथ शुरू हुई हैदराबाद मुख्यालय वाली यह ऑर्गनाइज़ेशन आज भारत के प्रमुख प्राइवेट-लेबल वॉटर ब्रांड्स में शामिल है। वर्तमान में यह 600 से अधिक ब्रांड्स को सर्व करती है, लगभग 45,000 बोतलें प्रतिदिन बनाती है, कई वॉटर कैटेगरीज़ में काम करती है और डिस्ट्रीब्यूशन-लेड मॉडल के जरिए भारत का पहला Water Super Market® बनाने की महत्वाकांक्षी दिशा में आगे बढ़ रही है। इस सफर का नेतृत्व Satish Naidu Karna, Managing Director & CEO, कर रहे हैं, जिनके करीब 25 वर्षों के अनुभव ने कंपनी को एक छोटे कस्टमाइज़्ड वॉटर प्रोवाइडर से ऐसे बिज़नेस में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है जो पानी के मार्केटिंग, डिस्ट्रीब्यूशन और एक्सपीरियंस के तरीके को नए सिरे से परिभाषित करना चाहता है।

जहाँ दूसरों ने कमोडिटी देखी, वहाँ अवसर पहचानना

हर सफल बिज़नेस की शुरुआत एक ऑब्ज़र्वेशन से होती है। Satish Naidu Karna और Oceana Positive के लिए यह ऑब्ज़र्वेशन एक ऐसे सेगमेंट से जुड़ा था जिसे इंडस्ट्री के कई लोग नजरअंदाज कर रहे थे।

COVID-19 के दौरान और उसके बाद कंपनी ने कंज़्यूमर बिहेवियर में बड़ा बदलाव देखा। हेल्थ, हाइजीन और वॉटर क्वालिटी को लेकर बढ़ती अवेयरनेस खरीदारी के फैसलों को प्रभावित कर रही थी। वहीं बिज़नेसेज़ ऐसे कस्टमाइज़्ड सॉल्यूशंस में ज्यादा रुचि लेने लगे थे जो ब्रांडिंग और कस्टमर एंगेजमेंट में उनकी मदद कर सकें। लेकिन बढ़ती डिमांड के बावजूद मार्केट में ऐसे प्रोफेशनली मैनेज्ड प्लेयर्स की कमी थी जो बड़े स्तर पर लगातार क्वालिटी, इनोवेशन और रिलायबिलिटी दे सकें।

कस्टमाइज़्ड और प्राइवेट-लेबल वॉटर सेगमेंट काफी हद तक फ्रैगमेंटेड था। इसमें बड़ी संख्या में छोटे ऑपरेटर्स थे जो सीमित कस्टमाइज़ेशन ऑप्शन्स, असंगत क्वालिटी स्टैंडर्ड्स और बेसिक पैकेजिंग सॉल्यूशंस ऑफर करते थे। प्रीमियम ब्रांडेड वॉटर की तलाश करने वाले कस्टमर्स के लिए ऐसे पार्टनर्स ढूँढना मुश्किल था जो फ्लेक्सिबिलिटी और प्रोफेशनलिज़्म दोनों दे सकें।

Satish Naidu Karna कहते हैं, “हमने कस्टमाइज़्ड और प्राइवेट लेबलिंग सेगमेंट में एक यूनिक अवसर पहचाना। जहाँ कंज़्यूमर्स तेजी से पर्सनलाइज़्ड वॉटर सॉल्यूशंस की तलाश कर रहे थे, वहीं मार्केट में ऐसे प्रोफेशनली मैनेज्ड प्लेयर्स की कमी थी जो MNC-लेवल क्वालिटी, कंसिस्टेंसी और इनोवेशन दे सकें।”

यही गैप Oceana Positive के बिज़नेस की नींव बना। ट्रेडिशनल पैकेज्ड वॉटर ब्रांड्स के साथ सीधे प्रतिस्पर्धा करने के बजाय कंपनी ने कस्टमाइज़ेशन, क्वालिटी, टेक्नोलॉजी और कस्टमर एक्सपीरियंस के आसपास एक अलग इकोसिस्टम तैयार करने पर फोकस किया।

20 बोतलों से 600+ ब्रांड्स तक

कंपनी की ग्रोथ स्टोरी बताती है कि लॉन्ग-टर्म विज़न और ऑपरेशनल डिसिप्लिन के साथ एक छोटे से निच अवसर को किस तरह स्केलेबल बिज़नेस में बदला जा सकता है।

Oceana Positive की शुरुआत 2013 में एक सिंगल कस्टमर और सिर्फ 20 बोतलों के ऑर्डर से हुई। समय के साथ कंपनी ने अपने कस्टमर बेस का विस्तार किया और हॉस्पिटैलिटी बिज़नेसेज़, रिटेल एस्टैब्लिशमेंट्स, एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस, कॉरपोरेट ऑफिसेज़ और डायरेक्ट कंज़्यूमर्स को सर्व करना शुरू किया। ग्रोथ के हर चरण ने कस्टमाइज़्ड और प्राइवेट-लेबल वॉटर सॉल्यूशंस की डिमांड को मजबूत किया।

इसकी जर्नी मैप इस प्रोग्रेस को स्पष्ट रूप से दिखाती है। शुरुआती वर्षों में 25 क्लाइंट्स से शुरुआत करके कंपनी 50 क्लाइंट्स और फिर 100 तक पहुँची और अंततः 500-क्लाइंट का माइलस्टोन पार किया। इसी दौरान प्रोडक्शन वॉल्यूम और ऑपरेशनल कैपेबिलिटीज़ भी बढ़ती गईं। एक छोटे वेंचर के रूप में शुरू हुई कंपनी धीरे-धीरे कस्टमाइज़्ड वॉटर सेगमेंट में एक पहचाने जाने वाले प्लेयर के रूप में विकसित हुई।

डिमांड बढ़ने के साथ Oceana Positive ने अपने इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने में निवेश किया। आज कंपनी साउथ इंडिया में पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर और एल्कलाइन वॉटर के लिए कोलैबोरेटिव स्टेट-ऑफ-द-आर्ट मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटीज़ का इस्तेमाल करती है। इसके साथ हिमाचल प्रदेश में एक एक्सक्लूसिव नेचुरल मिनरल वॉटर फैसिलिटी भी है। यह फैसिलिटी खास महत्व रखती है, क्योंकि भारत में नेचुरल मिनरल वॉटर की ऐसी फैसिलिटीज़ की संख्या सीमित है।

ये इन्वेस्टमेंट सिर्फ प्रोडक्शन कैपेसिटी बढ़ाने के लिए नहीं थे। इनके पीछे कंपनी का यह विश्वास था कि एक फ्रैगमेंटेड इंडस्ट्री में लॉन्ग-टर्म सक्सेस के लिए कंसिस्टेंसी, क्वालिटी और ऑपरेशनल रिलायबिलिटी जरूरी होगी।

बॉटल्ड वॉटर से आगे: ब्रांड वैल्यू तैयार करना

Oceana Positive के बिज़नेस मॉडल की सबसे अलग बातों में से एक है कस्टमर्स को पानी को ब्रांडिंग और एंगेजमेंट टूल में बदलने में मदद करना। ट्रेडिशनली पैकेज्ड वॉटर को एक यूटिलिटी परचेज़ माना जाता रहा है। Oceana Positive ने इसे अलग तरीके से देखा।

कंपनी ने पहचाना कि कस्टमाइज़्ड बोतलें किसी ब्रांड की आइडेंटिटी का एक्सटेंशन बन सकती हैं, खासकर होटल्स, कॉरपोरेट इवेंट्स, एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस, रिटेल स्पेसेज़ और प्रमोशनल कैंपेन में। इसी विज़न को सपोर्ट करने के लिए कंपनी ने पर्सनलाइज़्ड ब्रांडिंग, QR कोड्स, वेरिएबल डेटा प्रिंटिंग और कई डिज़ाइन ऑप्शन्स वाले कस्टमाइज़्ड वॉटर सॉल्यूशंस पेश किए।

कंपनी के अनुसार, ये सॉल्यूशंस कस्टमर्स को मजबूत ब्रांड रिकॉल, कंज़्यूमर टचपॉइंट्स पर ज्यादा विज़िबिलिटी और मार्केट में अपनी मौजूदगी को मजबूत करने का एक इकोनॉमिकल तरीका देते हैं। ट्रेडिशनल प्रमोशनल मटीरियल्स के विपरीत, कस्टमाइज़्ड वॉटर बोतलें डिस्ट्रीब्यूशन के बाद भी कंज़्यूमर्स के साथ इंटरैक्ट करती रहती हैं और एंगेजमेंट के अतिरिक्त अवसर पैदा करती हैं।

कंपनी अपने सेगमेंट में वेरिएबल डेटा प्रिंटिंग को स्टैंडर्ड ऑफरिंग बनाने वाली शुरुआती कंपनियों में भी शामिल रही है। इसके अलावा, कस्टमर रिक्वायरमेंट्स को ज्यादा एफिशिएंट तरीके से पूरा करने के लिए कंपनी ने एक कस्टम-बिल्ट एप्लिकेशन इकोसिस्टम विकसित किया। इन इनोवेशन्स ने Oceana Positive को एक ऐसे टेक्नोलॉजी-इनेबल्ड प्लेयर के रूप में स्थापित करने में मदद की, जो ऐसे इंडस्ट्री में काम कर रहा था जहाँ पहले डिजिटल इनोवेशन के बजाय ऑपरेशनल एक्ज़ीक्यूशन पर ज्यादा फोकस रहा था।

COVID के बाद बिज़नेस को फिर से गढ़ना

पैंडेमिक पीरियड ने लगभग हर इंडस्ट्री के बिज़नेसेज़ के सामने बड़ी चुनौतियाँ खड़ी कीं और Oceana Positive भी इससे अलग नहीं था। कंपनी को बल्क लेबल ऑर्डर्स की कम होती वायबिलिटी, हॉस्पिटैलिटी एस्टैब्लिशमेंट्स के बंद होने, बढ़ते रिसीवेबल्स प्रेशर, मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटीज़ में ऑपरेशनल स्ट्रेस और प्लान किए गए एक्सपैंशन में देरी जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इन परिस्थितियों ने ऑर्गनाइज़ेशन को अपनी प्रायोरिटीज़ और ऑपरेटिंग मॉडल पर दोबारा विचार करने के लिए मजबूर किया।

डिसरप्शन को सिर्फ एक सेटबैक मानने के बजाय Oceana Positive ने इस समय का इस्तेमाल खुद को रीइन्वेंट करने के लिए किया। कंपनी ने छोटे एस्टैब्लिशमेंट्स को सर्व करने पर फोकस किया, एडवांस्ड प्रिंटिंग टेक्नोलॉजीज़ में भारी निवेश किया, वेरिएबल डेटा प्रिंटिंग शुरू की, मैन्युफैक्चरिंग ऑपरेशन्स को ऑप्टिमाइज़ किया, प्रोडक्ट पोर्टफोलियो का विस्तार किया और स्ट्रैटेजिक को-पैकिंग मॉडल्स अपनाए। इन पहलों ने कंपनी की कैपेबिलिटीज़ को मजबूत करने के साथ ग्रोथ के नए रास्ते खोले।

इस अनुभव ने कंपनी को सिर्फ अलग-अलग प्रोडक्ट्स से आगे सोचने और यह समझने के लिए भी प्रेरित किया कि एक इंटीग्रेटेड इकोसिस्टम कस्टमर्स और डिस्ट्रीब्यूशन पार्टनर्स, दोनों की बेहतर सेवा कैसे कर सकता है। इसी सोच से India’s First Water Super Market® कॉन्सेप्ट सामने आया।

भारत का पहला Water Super Market® तैयार करना

अगर Oceana Positive के शुरुआती साल एक मार्केट गैप को पहचानने के बारे में थे, तो कंपनी का अगला चरण एक पूरी कैटेगरी तैयार करने पर केंद्रित है। कस्टमाइज़्ड वॉटर, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मैन्युफैक्चरिंग में वर्षों के अनुभव से सीख लेते हुए कंपनी ने जिसे India’s First Water Super Market® कॉन्सेप्ट कहा है, उसे विकसित किया। इसका उद्देश्य एक ही इकोसिस्टम के जरिए कस्टमर्स को वॉटर सॉल्यूशंस, पैकेजिंग फॉर्मैट्स और ब्रांडिंग ऑप्शन्स की व्यापक रेंज उपलब्ध कराना है।

यह कॉन्सेप्ट बदलती मार्केट जरूरतों को दर्शाता है। आज कस्टमर्स सिर्फ एक तरह का वॉटर सॉल्यूशन नहीं चाहते। कुछ एल्कलाइन वॉटर पसंद करते हैं, कुछ नेचुरल मिनरल वॉटर और कुछ फंक्शनल वॉटर। अलग-अलग बिज़नेसेज़ को अलग पैकेजिंग फॉर्मैट्स और ब्रांडिंग कैपेबिलिटीज़ की जरूरत होती है। एक ही प्लेटफॉर्म पर कई विकल्प उपलब्ध होने से ज्यादा सुविधा मिलती है और कस्टमर्स की व्यापक जरूरतों को पूरा किया जा सकता है।

Water Super Market® मॉडल के जरिए कस्टमर्स पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर, एल्कलाइन वॉटर, नेचुरल मिनरल वॉटर, फंक्शनल वॉटर्स, स्पोर्ट्स वॉटर, किड्स वॉटर, मिनरल-एनरिच्ड वैरिएंट्स, स्पेशलिटी ब्लेंडेड वॉटर्स और कार्बोनेटेड फ्लेवर्ड वॉटर्स जैसी कैटेगरीज़ तक पहुँच सकते हैं। पैकेजिंग ऑप्शन्स में प्लास्टिक, बायोडिग्रेडेबल अल्टरनेटिव्स, ग्लास बोतलें और टेट्रा पैक सॉल्यूशंस शामिल हैं। यह इनिशिएटिव इंडस्ट्री में खुद को अलग पहचान देने की कंपनी की सबसे महत्वाकांक्षी कोशिशों में से एक है।

डिस्ट्रीब्यूशन के जरिए स्केल करना

Oceana Positive के लिए Water Super Market® कॉन्सेप्ट तैयार करना सिर्फ पहला कदम था। असली चुनौती इसे अलग-अलग मार्केट्स तक पहुँचाने की थी। इसी वजह से कंपनी ने डिस्ट्रीब्यूशन-लेड ग्रोथ मॉडल तैयार करने पर काफी फोकस किया।

Satish Naidu Karna के अनुसार, ऑर्गनाइज़ेशन का विज़न सिर्फ प्रोडक्ट सेल्स तक सीमित नहीं है। कंपनी का उद्देश्य डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के जरिए लगातार छोटे क्लस्टर्स तैयार करके पर्सनल ब्रांडिंग को अफोर्डेबल और एक्सेसिबल बनाना है। इसके लिए डिस्ट्रीब्यूटर्स को सफल होने के लिए जरूरी रिसोर्सेज़, प्रोडक्ट्स और सिस्टम्स उपलब्ध कराए जा रहे हैं। एक महत्वपूर्ण उद्देश्य डिस्ट्रीब्यूशन पार्टनर्स के लिए प्रॉफिटेबल और सस्टेनेबल बिज़नेस ऑपर्च्युनिटीज़ तैयार करना है, साथ ही ज्यादा लोगों तक वॉटर सॉल्यूशंस का व्यापक पोर्टफोलियो पहुँचाना है।

यह मॉडल आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक में पहले ही उत्साहजनक सफलता दर्ज कर चुका है। इस मोमेंटम को आगे बढ़ाते हुए Oceana Positive आने वाले महीनों में इस कॉन्सेप्ट को पूरे भारत में एक्सपैंड करने की दिशा में काम कर रही है।

यह डिस्ट्रीब्यूशन फोकस कंपनी की फ्यूचर ग्रोथ स्ट्रैटेजी का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। प्रोडक्ट इनोवेशन और कस्टमर एक्सपीरियंस के साथ डिस्ट्रीब्यूटर कैपेबिलिटीज़ को मजबूत करना कंपनी की प्रमुख प्रायोरिटीज़ में शामिल है।

टेक्नोलॉजी, टैलेंट और ऑपरेशनल एक्सीलेंस

कंपनी के लगातार बढ़ते बिज़नेस के साथ टेक्नोलॉजी ट्रांसफॉर्मेशन और पीपल-सेंट्रिक ग्रोथ उसकी स्ट्रैटेजी के महत्वपूर्ण हिस्से बने हुए हैं। इस दिशा को Mrs. Priya Naidu, Director – Transformation ने प्रभावी रूप से आगे बढ़ाया है। उनकी विज़न, लीडरशिप और लगातार किए गए प्रयासों ने ऑर्गनाइज़ेशन की जर्नी को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

Oceana Positive उभरती टेक्नोलॉजीज़ और मार्केट ट्रेंड्स पर लगातार नजर रखती है और एफिशिएंसी तथा कस्टमर एक्सपीरियंस को बेहतर बनाने वाली पहलों में निवेश करती है। इसके टेक्नोलॉजी-इनेबल्ड इकोसिस्टम में कस्टम-बिल्ट मोबाइल एप्लिकेशन्स, ऑनलाइन डिज़ाइनिंग टूल्स, WhatsApp API इंटीग्रेशन, ऑटोमेटेड रिपोर्टिंग सिस्टम्स और डिजिटल मार्केटिंग-ड्रिवन एक्सपैंशन इनिशिएटिव्स शामिल हैं।

इसके साथ कंपनी लोगों और कल्चर पर भी काफी ध्यान देती है।

कई एम्प्लॉइज़ एक दशक से अधिक समय से Oceana Positive से जुड़े हुए हैं। यह ट्रस्ट, म्यूचुअल रिस्पेक्ट और लॉन्ग-टर्म ग्रोथ ऑपर्च्युनिटीज़ पर आधारित वर्कप्लेस एनवायरनमेंट को दर्शाता है। रिवॉर्ड और रिकग्निशन प्रोग्राम्स, एम्प्लॉई डेवलपमेंट इनिशिएटिव्स और बिलॉन्गिंग की मजबूत भावना ने ऐसा कल्चर तैयार करने में मदद की है जो परफॉर्मेंस और रिटेंशन, दोनों को सपोर्ट करता है।

Satish Naidu Karna की लीडरशिप फिलॉसफी एम्पावरमेंट, ट्रस्ट और अकाउंटेबिलिटी पर आधारित है।

वह कहते हैं, “मेरा मानना है कि लीडर्स को टीम्स को इंडिपेंडेंटली सोचने और ओनरशिप लेने के लिए एम्पावर करना चाहिए। मेरा डिसीजन-मेकिंग फ्रेमवर्क तीन सरल सवालों पर आधारित है: क्या हमारे पास सही फैक्ट्स और मटीरियल इन्फॉर्मेशन है? बड़ी तस्वीर क्या है? और हम वास्तव में क्या सॉल्व, इम्प्रूव या क्रिएट करने की कोशिश कर रहे हैं?”

ग्रोथ, सस्टेनेबिलिटी और आगे की राह

कंपनी के प्रमुख माइलस्टोन्स में से एक COVID-19 पीरियड के दौरान लगभग ₹3 करोड़ के रेवेन्यू बेस से बढ़कर 2026 में ₹200 करोड़ से अधिक वैल्यूएशन तक पहुँचना है। Oceana Positive के लिए यह उपलब्धि उसकी लॉन्ग-टर्म स्ट्रैटेजी और ग्रोथ पोटेंशियल की पुष्टि करती है।

आगे कंपनी पूरे भारत में अपने डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क का विस्तार करने, टेक्नोलॉजी-लेड कस्टमर एक्सपीरियंस को मजबूत करने, Water Super Market® कॉन्सेप्ट को टियर-2 और टियर-3 मार्केट्स तक ले जाने और प्रोडक्ट्स तथा पैकेजिंग सॉल्यूशंस में लगातार इनोवेशन करने की योजना बना रही है। इस दिशा को Mr. Yatheendra Ram – Head Distribution स्ट्रैटेजिक रूप से आगे बढ़ा रहे हैं, जिनकी लीडरशिप और प्रतिबद्धता कंपनी को उसके अगले एक्सपैंशन फेज़ की ओर ले जाने में महत्वपूर्ण रही है।

सस्टेनेबिलिटी भी एक महत्वपूर्ण विचार बनी हुई है। प्लास्टिक को पूरी तरह बदलने से जुड़ी व्यावहारिक चुनौतियों को स्वीकार करते हुए Oceana Positive एक प्लास्टिक-पॉज़िटिव अप्रोच को बढ़ावा देती है। ऑर्गनाइज़ेशन का लक्ष्य जितनी बोतलें बेचता है, उससे ज्यादा बोतलों को रीसायकल करना है। यह एक ज्यादा जिम्मेदार और एनवायरनमेंटली कॉन्शियस इकोसिस्टम तैयार करने की उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

कंपनी का विज़न दुनिया की सबसे बड़ी व्हाइट-लेबल वॉटर कंपनी बनना, भारत के First Water Super Market® को देश के हर शहर तक पहुँचाना और ऐसे लाइक-माइंडेड पार्टनर्स के साथ काम करना है जो इसी महत्वाकांक्षा को साझा करते हों।

इस सफर में तीन सबक लगातार Satish Naidu Karna को गाइड करते हैं: अनचार्टेड पाथ पर चलने से कभी न हिचकिचाना, मजबूत प्रोसेसेज़ बनाने पर फोकस करना और लोगों को इस तरह एम्पावर करना कि आपकी गैर-मौजूदगी में भी ऑर्गनाइज़ेशन आगे बढ़ता रहे। यही सिद्धांत इंडस्ट्री में प्रवेश करने वाले एस्पायरिंग एंटरप्रेन्योर्स के लिए उनकी सलाह को भी आकार देते हैं। उनके अनुसार, वॉटर बिज़नेस में सफलता के लिए गहन रिसर्च, धैर्य, ऑपरेशनल एक्सीलेंस और लॉन्ग-टर्म सोच जरूरी है। “लो क्वालिटी या शॉर्टकट्स के आधार पर सक्सेस नहीं बनाई जा सकती। क्वालिटी, कंसिस्टेंसी और ट्रस्ट सस्टेनेबल ग्रोथ की नींव हैं,” वह निष्कर्ष देते हैं।

सिर्फ 20 बोतलों के एक ऑर्डर से शुरू होकर सैकड़ों ब्रांड्स को सर्व करने वाले बिज़नेस तक पहुँची Oceana Positive की कहानी सिर्फ ग्रोथ की कहानी नहीं है। यह एक ऐसी कंपनी के विकास की कहानी है जिसने एक नजरअंदाज किए गए अवसर को पहचाना, एक फ्रैगमेंटेड सेगमेंट को प्रोफेशनल बनाया और अब दुनिया के सबसे जरूरी प्रोडक्ट्स में से एक के आसपास एक स्केलेबल इकोसिस्टम तैयार करने की दिशा में काम कर रही है। जैसे-जैसे भारत की पैकेज्ड वॉटर इंडस्ट्री अपने अगले एक्सपैंशन फेज़ में प्रवेश कर रही है, Oceana Positive खुद को सिर्फ इस ग्रोथ में शामिल होने के लिए नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों में इस कैटेगरी के विकास की दिशा को आकार देने के लिए भी तैयार कर रही है।

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