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सुब्रत चटर्जी

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भरोसे, अनुभव और व्यक्तिगत ध्यान के साथ लग्ज़री ट्रैवल को नया रूप देना

आज के समय में ट्रैवल काफी हद तक डिजिटल और ऑटोमेटेड हो गया है, जहाँ कई बार सब कुछ सिर्फ एक लेन-देन जैसा लगता है। ऐसे में इंसानी अनुभव और पर्सनल सर्विस की अहमियत कम होती दिखती है। लेकिन जो लोग सिर्फ घूमने नहीं, बल्कि एक खास अनुभव चाहते हैं, उनके लिए सही मार्गदर्शन आज भी बहुत जरूरी है।

सुब्रत चटर्जी, जो वेदिक जर्नी के फाउंडर और CEO हैं, उनके लिए ट्रैवल सिर्फ एक जगह से दूसरी जगह जाना नहीं है। यह एक ऐसा अनुभव है जो लोगों को नई संस्कृतियों, परंपराओं और खुद से जोड़ता है।

लगभग 29 साल के अनुभव के साथ, उन्होंने ट्रैवल, हॉस्पिटैलिटी और एविएशन इंडस्ट्री में कई बदलाव देखे हैं—चाहे वह टेक्नोलॉजी का असर हो, लोगों की बदलती उम्मीदें हों या बड़े वैश्विक संकट। लेकिन इन सबके बीच उनकी एक सोच हमेशा एक जैसी रही—भरोसे, अनुभव और व्यक्तिगत ध्यान के साथ आसान और बेहतर ट्रैवल अनुभव देना।

उनका वेंचर, वेदिक जर्नी, इसी सोच को आगे बढ़ाता है, जहाँ आधुनिक सुविधाओं के साथ पारंपरिक अनुभवों को जोड़ा जाता है और खास तौर पर तैयार किए गए ट्रैवल प्लान दिए जाते हैं।

अनुभव से बना सफर

सुब्रत का करियर मई 1997 में शुरू हुआ, जब उन्होंने एक इंटरनेशनल ट्रैवल डेस्क पर काम करना शुरू किया। समय के साथ उन्होंने ट्रैवल इंडस्ट्री के हर हिस्से को करीब से समझा—लॉजिस्टिक्स, ऑपरेशन्स, ग्राहकों के साथ काम करना और अंतरराष्ट्रीय नियमों को संभालना।

इसके बाद उन्हें दुनिया की कुछ बड़ी ट्रैवल कंपनियों के साथ काम करने का मौका मिला, जैसे अमेरिकन एक्सप्रेस, एचआरजी सिता और कार्लसन वैगनलिट ट्रैवल। यहाँ उन्होंने सिस्को, एगिलेंट, नॉर्टेल, कोका-कोला, ओरेकल, सैमसंग, सोनी, कारगिल, टेक महिंद्रा और डाइकिन जैसी बड़ी कंपनियों के लिए ट्रैवल मैनेज किया।

ऐसे काम में हर छोटी-बड़ी चीज का ध्यान रखना जरूरी होता है—जैसे सही समय पर प्लानिंग, भरोसेमंद सर्विस और बदलते वीज़ा नियमों को समझना। समय के साथ उन्होंने इंटरनेशनल ट्रैवल पर भी ध्यान बढ़ाया और अलग-अलग देशों के लोगों के साथ काम करते हुए उनकी जरूरतों और पसंद को समझा।

महामारी के दौरान लिया गया बड़ा फैसला

कोविड-19 के समय पूरी दुनिया का ट्रैवल इंडस्ट्री लगभग रुक गया था। फ्लाइट्स बंद हो गई थीं और कई देशों की सीमाएँ लंबे समय तक बंद रहीं। यह समय पूरी इंडस्ट्री के लिए मुश्किल था, लेकिन सुब्रत के लिए यही वह मोड़ बना जिसने उन्हें अपना काम शुरू करने के लिए प्रेरित किया।

फरवरी 2021 में उन्होंने नई दिल्ली में वेदिक जर्नी की शुरुआत की। यह उनके कई सालों के अनुभव का अगला कदम था, जहाँ उन्होंने अपने सीखे हुए को एक स्वतंत्र बिज़नेस में बदला।

वेदिक जर्नी का फोकस ऐसे ट्रैवल अनुभव बनाना है जो सिर्फ घूमने तक सीमित न हों, बल्कि लोगों को अलग-अलग संस्कृतियों और परंपराओं से जोड़ें। स्थानीय एक्सपर्ट्स के साथ मिलकर तैयार किए गए ट्रैवल प्लान्स के जरिए यह कंपनी लोगों को एक गहरा और अलग अनुभव देने की कोशिश करती है।

इसका मकसद सिर्फ ट्रैवल कराना नहीं, बल्कि ऐसे सफर बनाना है जो लोगों को नई समझ दें और उन्हें अलग संस्कृतियों से जोड़ें। कंपनी के मूल सिद्धांतों में परंपराओं को बचाना, असली अनुभव देना, पर्यावरण का ध्यान रखना और हर ग्राहक को बेहतरीन सर्विस देना शामिल है।

चुने हुए लग्ज़री ट्रैवल अनुभव देना

वेदिक जर्नी भारत और विदेश दोनों जगहों पर कस्टमाइज्ड लग्ज़री ट्रैवल अनुभव देने में विशेषज्ञ है। यह तैयार पैकेज देने के बजाय हर ग्राहक की पसंद और जरूरत के हिसाब से अलग ट्रैवल प्लान बनाती है।

कंपनी ट्रैवल से जुड़ी हर जरूरत को संभालती है—जैसे वीज़ा में मदद, जमीन पर ट्रांसपोर्ट, रहने की व्यवस्था और गाइड के साथ टूर। जटिल इंटरनेशनल ट्रैवल प्लान से लेकर पूरे सफर को संभालने तक, यह कंपनी ग्राहकों के लिए एक ही जगह पर पूरी सुविधा देती है।

सुब्रत के लंबे समय से बने भरोसेमंद पार्टनर्स का नेटवर्क भी इसमें अहम भूमिका निभाता है। वे सिर्फ उन्हीं एयरलाइंस, होटल्स और लोकल पार्टनर्स के साथ काम करते हैं जिन पर भरोसा किया जा सके, ताकि हर ग्राहक को एक जैसा अच्छा अनुभव मिले।

कंपनी मुख्य रूप से एनआरआई, हाई नेट वर्थ लोगों, डॉक्टरों और डिफेंस से जुड़े लोगों के साथ काम करती है, जिन्हें खास और लचीले ट्रैवल प्लान की जरूरत होती है।

भरोसे पर बनी पहचान

इतने प्रतिस्पर्धी ट्रैवल इंडस्ट्री में, सुब्रत मानते हैं कि भरोसा और काम की विश्वसनीयता ही सबसे बड़ी पहचान बनाते हैं। लगभग तीन दशकों के अनुभव के साथ, वह पहले से ही संभावित दिक्कतों को समझ लेते हैं और उसी हिसाब से ट्रैवल प्लान तैयार करते हैं।

ट्रैवल प्लानिंग में कई तरह की जटिलताएँ होती हैं—जैसे वीज़ा नियम, ट्रांजिट वीज़ा की जरूरत, अचानक कैंसिलेशन, फ्लाइट बदलना या कनेक्शन मिस होना। सुब्रत खुद इन सभी चीजों को संभालते हैं, ताकि यात्रियों को इन तकनीकी बातों की चिंता न करनी पड़े।

अगर किसी वजह से फ्लाइट छूट जाती है या प्लान में बदलाव करना पड़ता है, तो वह तुरंत पूरे ट्रैवल प्लान को दोबारा सेट करते हैं और उसे आसान बनाए रखते हैं।

उनके लिए असली सफलता यह है कि ग्राहक उन पर कितना भरोसा करते हैं। पिछले 29 सालों में, उनके काम में कोई बड़ी शिकायत नहीं आई है और उनका ज्यादातर काम पुराने ग्राहकों और उनके रेफरल्स से आता है।

सही टीम बनाना

वेदिक जर्नी की टीम बहुत बड़ी नहीं है, लेकिन सुब्रत इसके विकास पर खास ध्यान देते हैं। टीम के लोगों को लगातार नए ट्रैवल ट्रेंड्स, नियमों और नए डेस्टिनेशन के बारे में अपडेट रहने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, ताकि ग्राहकों को सही और बेहतर सलाह दी जा सके।

कंपनी अच्छी सैलरी, नियमित ट्रेनिंग और इंडस्ट्री से जुड़े नए अनुभव देकर लोगों को अपने साथ जोड़कर रखती है।

डिजिटल दौर में इंसानी समझ की अहमियत

जैसे-जैसे टेक्नोलॉजी ट्रैवल इंडस्ट्री को बदल रही है, सुब्रत यह मानते हैं कि इसका सही इस्तेमाल काम को आसान बनाने के लिए जरूरी है। वह दुनिया भर के ट्रैवल संगठनों, एविएशन अथॉरिटी और IATA से जुड़े अपडेट्स पर नजर रखते हैं और एडवांस सिस्टम का इस्तेमाल करके ट्रैवल प्लानिंग को बेहतर बनाते हैं।

लेकिन उनका मानना है कि टेक्नोलॉजी इंसानी समझ की जगह नहीं ले सकती। AI और ऑटोमेशन काम को आसान बना सकते हैं, लेकिन जब जटिल ट्रैवल प्लान या अचानक समस्या आती है, तब अनुभवी व्यक्ति की जरूरत हमेशा रहेगी।

वह कहते हैं, “टेक्नोलॉजी काम को आसान कर सकती है, लेकिन एक अनुभवी ट्रैवल एक्सपर्ट की जगह नहीं ले सकती।”

इसके साथ ही, वेदिक जर्नी अपनी डिजिटल मौजूदगी भी बढ़ा रही है। कंपनी नए डेस्टिनेशन, लग्ज़री रिसॉर्ट्स और खास ट्रैवल अनुभवों को लोगों तक पहुंचाने पर काम कर रही है।

सफर से मिली सीख

करीब तीन दशकों के अनुभव के बाद, सुब्रत कहते हैं कि सबसे बड़ी सीख उन्हें अलग-अलग देशों के ग्राहकों के साथ काम करके मिली है—चाहे वे अमेरिका से हों, यूरोप से या मिडिल ईस्ट से। हर व्यक्ति की अपनी अलग पसंद होती है—कहाँ जाना है, क्या खाना है और क्या देखना है। इन सबको समझना ही सही ट्रैवल अनुभव देने की कुंजी है।

इस क्षेत्र में आने वाले लोगों के लिए उनकी सलाह सीधी है—धैर्य रखें, ग्राहक पर ध्यान दें और ध्यान से सुनना सीखें। साथ ही, ट्रैवल इंडस्ट्री में हो रहे बदलावों के साथ अपडेट रहना और तकनीकी चीजों को समझना भी जरूरी है, जैसे ट्रैवल सॉफ्टवेयर, वीज़ा नियम और इमिग्रेशन की प्रक्रिया।

सबसे जरूरी बात, वह कहते हैं कि हमेशा कुछ अतिरिक्त देने की कोशिश करें, जिसकी ग्राहक को उम्मीद न हो। यही चीज लंबे समय तक मजबूत रिश्ते बनाती है।

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