अधिकतर नजरिए से देखा जाए तो विनय कुमार कोलुसु एक सुरक्षित प्रोफेशनल रास्ते पर थे।
उन्होंने अपनी मेहनत से मिली शिक्षा के आधार पर न्यूयॉर्क सिटी की फॉर्च्यून 500 कंपनियों में एक स्थिर और प्रभावशाली करियर बनाया था।
लेकिन वैश्विक सफलता के इस स्तर से भी भारत के औद्योगिक क्षेत्र की कमियां नजरअंदाज करना संभव नहीं था।
जैसे-जैसे देश में मैन्युफैक्चरिंग बढ़ रही है, वैसे-वैसे बिना योजना के मशीन बंद होना, ऊर्जा की बर्बादी और असुरक्षित तरीके अब भी बने हुए हैं।
मशीन खराब होने के बाद ही कदम उठाए जाते हैं, जबकि इसका असर सिर्फ काम पर नहीं, बल्कि लोगों की रोजी-रोटी और सुरक्षा पर भी पड़ता है।
समय के साथ यह तरीका इंडस्ट्री का हिस्सा बन गया है।
KLVIN टेक्नोलॉजी लैब्स इसी सोच को बदलने और पहले से रोकथाम करने वाले तरीके को अपनाने के लिए शुरू की गई।
KLVIN की शुरुआत
विनय की सोच उद्यमिता से पहले ही बन चुकी थी।
वह एक टियर-2 शहर में छह लोगों के मध्यमवर्गीय परिवार में पले-बढ़े।
उनके पिता एलआईसी में एक जूनियर कर्मचारी थे, जो सीमित वेतन में भी अपने बच्चों को बेहतर अवसर देने के लिए लगातार मेहनत करते थे।
बचपन से ही उन्होंने समझा कि आर्थिक असुरक्षा क्या होती है, जहां एक छोटी सी समस्या भी पूरे परिवार का भविष्य बदल सकती है।
यहां स्थिरता केवल अनुशासन, मेहनत और शिक्षा पर विश्वास से आती थी।
इसी विश्वास ने उन्हें इंजीनियरिंग, कैंपस प्लेसमेंट और पूरी तरह मेहनत के दम पर बने करियर तक पहुंचाया।
आखिरकार वह न्यूयॉर्क सिटी की फॉर्च्यून 500 कंपनियों तक पहुंचे।
लेकिन विदेश में सफलता मिलने के बावजूद, उनका मन भारत की ओर खिंचता रहा।
2019 में उन्होंने भारत लौटने का फैसला किया और इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस के पीजीपीमैक्स प्रोग्राम में दाखिला लिया, जहां उनका उद्देश्य और स्पष्ट हुआ।
देशभर की फैक्ट्रियों का दौरा करने के बाद उनकी सोच पूरी तरह साफ हो गई।
पचास से ज्यादा फैक्ट्री विजिट में उन्होंने एक पैटर्न देखा—ऐसे हादसे जिन्हें रोका जा सकता था, खराब मशीनों के साथ काम करते मजदूर, और मेंटेनेंस के तरीके जो खराबी को सामान्य मान लेते थे।
उन्होंने महसूस किया कि यह सिर्फ तकनीक की कमी नहीं, बल्कि सही जानकारी की कमी है।
इसी समस्या को हल करने के लिए KLVIN की शुरुआत की गई, ताकि मशीन खराब होने से लोगों के जीवन पर असर न पड़े।
भारतीय इंडस्ट्री के लिए इंजीनियरिंग
फरवरी 2024 में, विनय ने KLVIN टेक्नोलॉजी लैब्स की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य मशीनों को समझदार बनाकर अनियोजित बंदी, ऊर्जा बर्बादी और असुरक्षित तरीकों को खत्म करना था।
यह एक AI आधारित इंडस्ट्रियल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म है, जो मशीन खराब होने से पहले ही उसकी भविष्यवाणी करता है।
जहां पारंपरिक सिस्टम केवल डेटा दिखाते हैं, वहीं यह प्लेटफॉर्म ऐसे संकेत देता है जिनसे समय रहते कदम उठाए जा सकें।
यह स्टील, फूड प्रोसेसिंग, पेपर, रबर, फार्मास्यूटिकल और हेवी इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में काम करता है।
यह खास तौर पर भारत की उन फैक्ट्रियों के लिए बनाया गया है जहां पुरानी मशीनें, कठिन काम का माहौल और सीमित डिजिटल व्यवस्था होती है।
इसे कुछ हफ्तों में लगाया जा सकता है और इसकी लागत वैश्विक प्लेटफॉर्म्स से 60–70% कम है।
KLVIN के सिस्टम में मल्टी-सेंसर IoT डिवाइस शामिल हैं, जो कंपन, तापमान, ध्वनि और मैग्नेटिक संकेतों को मापते हैं।
एज AI मशीन के लिए अलग-अलग बेसलाइन तैयार करता है, वह भी बिना पुराने डेटा के।
केंद्रीकृत डैशबोर्ड के जरिए अलग-अलग प्लांट की जानकारी रियल-टाइम में मिलती है।
प्रेडिक्टिव अलर्ट मेंटेनेंस टीम को पहले ही चेतावनी दे देते हैं, जिससे मशीन खराब होने से पहले ही सुधार किया जा सके।
इसका परिणाम यह रहा है कि अनियोजित बंदी में 30–50% तक कमी आई है और ऊर्जा की बचत 15–20% तक हुई है।
भविष्यवाणी की सटीकता 85% से अधिक है और निवेश की भरपाई 6–12 महीनों में हो जाती है।
स्पष्ट मूल्यों के साथ काम करते हुए—परिणाम पर ध्यान, सुरक्षा को प्राथमिकता, भारत के लिए समाधान और काम में ईमानदारी—KLVIN का लक्ष्य भारत का सबसे भरोसेमंद इंडस्ट्रियल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म बनना है।
पहले सिद्धांतों से किफायती समाधान
भारतीय फैक्ट्रियों के लिए गहरी तकनीक बनाना आसान नहीं था।
पहली चुनौती थी कठिन परिस्थितियों में काम करने वाले सिस्टम बनाना, जहां धूल, गर्मी, बिजली की समस्या और पुरानी मशीनें होती हैं।
इसलिए मौजूदा सिस्टम को बदलने के बजाय, KLVIN को शुरुआत से ही इन परिस्थितियों के अनुसार बनाया गया।
दूसरी चुनौती थी भरोसा बनाना, क्योंकि इंडस्ट्री तब ही नई तकनीक अपनाती है जब वह जमीन पर सही साबित हो।
पायलट प्रोजेक्ट, लगातार सुधार और सख्त परीक्षण के जरिए यह भरोसा बनाया गया।
जैसा विनय कहते हैं, “हर फैक्ट्री ने हमें वह सिखाया जो हमारी लैब नहीं सिखा सकती थी।”
यही शुरुआती चुनौतियां आज KLVIN की सबसे बड़ी ताकत बन गई हैं।
यह प्लेटफॉर्म भारत की जरूरतों के अनुसार बना है, कम लागत में काम करता है और जल्दी लागू किया जा सकता है।
सही टीम बनाना
विनय का टैलेंट को लेकर नजरिया उनके अपने अनुभव से बना है।
KLVIN में भर्ती डिग्री के आधार पर नहीं, बल्कि समस्या हल करने की क्षमता के आधार पर होती है।
इंजीनियरों को केवल सिस्टम पर काम नहीं करना होता, बल्कि उन्हें फैक्ट्री में जाकर असली हालात को समझना होता है।
उनके अनुसार, काम का असर ही लोगों को लंबे समय तक जोड़े रखता है।
सफलता की नई परिभाषा
विनय के अनुसार सफलता का मतलब है भारत की इंडस्ट्रियल मशीनों के लिए एक ऐसा सिस्टम बनाना, जहां मेंटेनेंस, ऊर्जा और सुरक्षा से जुड़े फैसले पहले से और डेटा के आधार पर लिए जाएं।
उनके लिए व्यक्तिगत सफलता का मतलब है कि मजदूर सुरक्षित घर लौटें, क्योंकि मशीन खराब होने की भविष्यवाणी पहले ही हो चुकी थी।
वह कहते हैं कि एक परिवार पर एक समस्या का क्या असर होता है, यह उन्होंने खुद देखा है।
इसी सोच का असर KLVIN की शुरुआती उपलब्धियों में भी दिखता है।
पहले ही साल में कंपनी को ₹62 लाख से ज्यादा की ग्रांट मिली, पेटेंट मिला और अलग-अलग इंडस्ट्री में काम शुरू हुआ।
इंटेलिजेंस सिस्टम को आगे बढ़ाना
इस इंडस्ट्री में जहां गलतियों का असर बड़ा होता है, वहां बदलाव से आगे रहना जरूरी है।
विनय लगातार फैक्ट्रियों के साथ जुड़े रहते हैं और असली अनुभव से सीखते हैं।
KLVIN अब अपने सिस्टम को और जगहों तक पहुंचाने और सटीकता बनाए रखने पर काम कर रहा है।
इसके साथ ही डेयरी, कोल्ड चेन और फ्लीट इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में भी विस्तार की योजना है।
विनय कहते हैं, “ऐसी बढ़त जिसका असर गुणवत्ता पर पड़े, वह असली बढ़त नहीं है।”
आने वाले समय में वह ऐसी फैक्ट्रियां देखते हैं जहां मशीनें खुद ही समस्या पहचान लें और हादसे पहले ही रोके जा सकें।
भारत का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है और KLVIN खुद को इस बदलाव का आधार बनाना चाहता है।
फाउंडर की सोच
विनय कहते हैं, “मैंने KLVIN इसलिए बनाया क्योंकि मैं समझता हूं कि काम करने वाले परिवारों के लिए क्या दांव पर लगा होता है।
मैं खुद ऐसे परिवार से आता हूं जहां मेरे पिता हर रुपये को सोच-समझकर खर्च करते थे और ज्यादा काम करते थे ताकि हमें बेहतर जीवन मिल सके।”
वह कहते हैं कि फैक्ट्री में काम करने वाले लोग भी यही जिम्मेदारी उठाते हैं।
एक मशीन खराब होने से उनका पूरा जीवन प्रभावित नहीं होना चाहिए।
उद्यमिता पर उनका सीधा संदेश है—समस्या से शुरुआत करें, न कि प्रस्तुति से।
अगर आपके पास ज्यादा संसाधन नहीं हैं, तो उसे अपनी सीमा मत बनाइए।
वह मानते हैं कि कठिनाइयों को समझना एक ताकत है, कमजोरी नहीं।
